अग्निकुल को 200 करोड़ की RDI सहायता से रीयूजेबल रॉकेट विकास को गति
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी नवाचार को नई मजबूती देते हुए प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने चेन्नई स्थित स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस प्राइवेट लिमिटेड के साथ 25 सितंबर 2026 को एक समझौता किया। इस समझौते के तहत सरकार के रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड से 200 करोड़ रुपये की सहायता अग्निबाण रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल (RLV) के विकास के लिए दी जाएगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अंतरिक्ष प्रक्षेपण तकनीक में पुन: उपयोग, लागत घटाने और अधिक बार लॉन्च की क्षमता पर तेजी से काम कर रहा है।
अग्निबाण RLV क्यों अहम है
अग्निबाण रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि इसके सिस्टम-स्तर पर पुन: उपयोग की क्षमता बढ़े। पारंपरिक रॉकेटों में जहां मुख्य रूप से पहले चरण की रिकवरी पर ध्यान दिया जाता है, वहीं इस परियोजना में पुन: उपयोग योग्य ऊपरी चरण, अवतरण प्रणाली और रिकवरी सिस्टम जैसे घटक शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल एक प्रक्षेपण नहीं, बल्कि बार-बार उपयोग होने वाला अधिक व्यावहारिक लॉन्च प्लेटफॉर्म विकसित करना है।
इस परियोजना में प्रोपल्शन, आरोहण, कक्षीय प्रविष्टि, नियंत्रित अवतरण और रिकवरी जैसे चरणों पर काम होगा। साथ ही हल्के ऊपरी चरण और सेमी-क्रायोजेनिक द्रव प्रणोदन प्रणाली पर भी ध्यान दिया जाएगा, जिसमें डीप थ्रॉटलिंग और पुनः-प्रारंभ क्षमता जैसी विशेषताएं होंगी।
RDI फंड और वित्तीय ढांचा
यह सहायता सरकार के RDI फंड के माध्यम से दी जा रही है, जिसका उद्देश्य उन स्वदेशी तकनीकों को समर्थन देना है जो उन्नत विकास चरण से आगे बढ़कर वास्तविक उपयोग की ओर जा रही हैं। इस तरह की फंडिंग का मकसद केवल शोध तक सीमित न रहकर तकनीक को बाजार या परिचालन स्तर तक पहुंचाना है।
200 करोड़ रुपये की यह राशि ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर्स के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी। यह एक ऐसा वित्तीय साधन है जिसमें तय शर्तों के अनुसार ऋण को इक्विटी में बदला जा सकता है। स्टार्टअप और उभरती तकनीकी कंपनियों के लिए यह मॉडल विकास और पूंजी दोनों दृष्टि से उपयोगी माना जाता है।
तकनीकी तैयारी और भारत के लिए महत्व
इस कार्यक्रम का लक्ष्य तकनीक को Technology Readiness Level 4 से आगे बढ़ाकर TRL-8 तक ले जाना है। TRL-8 वह स्तर माना जाता है, जहां प्रणाली परीक्षणों के बाद लगभग परिचालन उपयोग के लिए तैयार मानी जाती है। यानी यह सहायता केवल अवधारणा स्तर की नहीं, बल्कि वास्तविक प्रणाली-योग्यता और संचालन-तैयारी की दिशा में है।
रीयूजेबल लॉन्च व्हीकल अंतरिक्ष प्रक्षेपण की लागत कम करने, मिशनों की आवृत्ति बढ़ाने और अंतरिक्ष मलबे को घटाने में मददगार माने जाते हैं। भारत के अंतरिक्ष तंत्र में लॉन्च वाहन, उपग्रह, प्रणोदन प्रणाली और रिकवरी तकनीकें पहले से ही महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। ऐसे में अग्निकुल जैसी निजी कंपनी को मिला यह समर्थन देश की स्पेस इकोनॉमी और स्वदेशी नवाचार को नई दिशा दे सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्य करता है।
- TDB की स्थापना प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड अधिनियम, 1995 के तहत की गई थी।
- ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर ऐसा ऋण साधन है जिसे तय शर्तों पर इक्विटी में बदला जा सकता है।
- TRL-8 का अर्थ है कि तकनीक परीक्षणों के बाद प्रणाली-स्तर पर लगभग परिचालन उपयोग के लिए तैयार है।
यह समझौता भारत में अंतरिक्ष तकनीक के निजीकरण, स्वदेशी निर्माण और पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणालियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।