HAL कोरापुट की 2000वीं इंजन उपलब्धि से स्वदेशी रक्षा क्षमता को बल

HAL कोरापुट की 2000वीं इंजन उपलब्धि से स्वदेशी रक्षा क्षमता को बल

ओडिशा के कोरापुट स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की इकाई ने अपनी 2000वीं एयरो-इंजन डिलीवर कर एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। यह मील का पत्थर लगभग छह दशकों से चल रही इंजन निर्माण और ओवरहॉलिंग क्षमता को दर्शाता है, जिसने भारत की सैन्य विमानन जरूरतों को लगातार सहारा दिया है।

कोरापुट इकाई की लंबी औद्योगिक यात्रा

HAL की कोरापुट डिवीजन की स्थापना 1964 में हुई थी। तब से यह इकाई लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्मों के लिए इंजन निर्माण, मरम्मत और ओवरहॉलिंग के क्षेत्र में काम कर रही है। यहां MiG-21FL, MiG-21bis, MiG-27 और MiG-29 जैसे विमानों के लिए इंजन तैयार किए गए और उनकी सर्विसिंग भी की गई।

यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि भारत की उस क्षमता का संकेत है जिसमें रक्षा क्षेत्र के लिए जटिल तकनीकी प्रणालियों का उत्पादन देश के भीतर किया जा रहा है। रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में HAL कोरापुट जैसी इकाइयों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण रही है।

शक्ति इंजन लाइन से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

कोरापुट में शक्ति इंजनों की दूसरी उत्पादन लाइन भी शुरू की जा रही है, जिस पर 218 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। शक्ति इंजन का उपयोग ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और HAL प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर में होता है। दोनों हेलीकॉप्टर स्वदेशी पावरप्लांट पर आधारित भारत की बढ़ती एयरोस्पेस क्षमता के उदाहरण हैं।

नई उत्पादन लाइन से न केवल क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य की जरूरतों के लिए सप्लाई चेन और निर्माण प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी। यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत अपने सैन्य प्लेटफॉर्मों के लिए घरेलू इंजन और उप-प्रणालियों पर अधिक जोर दे रहा है।

AL-31FP कार्यक्रम से स्वदेशीकरण को नई दिशा

वर्ष 2024 में रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 240 AL-31FP इंजनों के लिए 26,000 करोड़ रुपये का अनुबंध किया था। इन इंजनों का निर्माण कोरापुट में किया जाना है और इस कार्यक्रम के अंत तक स्वदेशी सामग्री को 63 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना है। AL-31FP इंजन Su-30MKI लड़ाकू विमान में उपयोग होता है, जो भारतीय वायुसेना की प्रमुख लड़ाकू क्षमता का हिस्सा है।

यह कार्यक्रम भारत की रक्षा उत्पादन नीति के उस व्यापक लक्ष्य से जुड़ा है, जिसमें सैन्य प्रणालियों के घरेलू डिजाइन, विकास और निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। कोरापुट इकाई इस लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की एयरोस्पेस इकाइयों में शामिल है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • HAL की कोरापुट इकाई की स्थापना 1964 में ओडिशा में हुई थी।
  • यह इकाई सैन्य विमानों के लिए इंजन निर्माण और ओवरहॉलिंग का काम करती है।
  • शक्ति इंजन का उपयोग ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और HAL प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर में होता है।
  • AL-31FP इंजन Su-30MKI लड़ाकू विमान में लगाया जाता है।

2000वीं इंजन डिलीवरी HAL कोरापुट की तकनीकी निरंतरता और भारत की बढ़ती रक्षा निर्माण क्षमता का संकेत है। आने वाले वर्षों में नई उत्पादन लाइन और बड़े अनुबंध इस इकाई की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकते हैं।

Originally written on October 6, 2026 and last modified on October 6, 2026.

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