2030 तक हेपेटाइटिस बी-सी उन्मूलन पर भारत का फोकस
भारत ने 2030 तक हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य को दोहराया है। यह प्रतिबद्धता राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) से जुड़ी है, जिसके तहत देश में जांच, उपचार, जागरूकता और रेफरल सेवाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे के जरिए मजबूत किया जा रहा है।
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम क्या है
NVHCP की शुरुआत 2018 में एक जन-केंद्रित स्वास्थ्य रणनीति के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और जन-जागरूकता को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के तहत जिला अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में हेपेटाइटिस बी और सी की मुफ्त सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
कार्यक्रम का एक अहम पहलू यह है कि यह केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि संक्रमण की पहचान से लेकर मरीज को सही स्तर की सुविधा तक पहुंचाने की पूरी श्रृंखला को कवर करता है। इससे उन लोगों तक भी सेवाएं पहुंचती हैं, जो निजी स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च नहीं उठा सकते।
हेपेटाइटिस बी और सी क्यों चिंता का विषय हैं
हेपेटाइटिस बी और सी दोनों वायरस से होने वाले संक्रमण हैं, जो मुख्य रूप से यकृत यानी लिवर को प्रभावित करते हैं। समय पर पहचान और उपचार न होने पर ये संक्रमण क्रॉनिक लिवर डिजीज, सिरोसिस और लिवर कैंसर तक का कारण बन सकते हैं।
हेपेटाइटिस बी मां से बच्चे में प्रसव के दौरान, संक्रमित रक्त, असुरक्षित इंजेक्शन या असुरक्षित यौन संपर्क के जरिए फैल सकता है। दूसरी ओर, हेपेटाइटिस सी मुख्य रूप से संक्रमित रक्त और असुरक्षित चिकित्सकीय प्रक्रियाओं से फैलता है। हेपेटाइटिस बी के लिए टीका उपलब्ध है, जबकि हेपेटाइटिस सी के लिए टीका नहीं है, लेकिन इसका इलाज एंटीवायरल दवाओं से संभव है।
भारत की रणनीति और हालिया प्रगति
भारत में गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी के लिए सार्वभौमिक स्क्रीनिंग की जाती है। नवजात शिशुओं को यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी की जन्म खुराक दी जाती है, जिसके बाद 6, 10 और 14 सप्ताह पर अतिरिक्त खुराकें दी जाती हैं।
उपचार को सुलभ बनाने के लिए कार्यक्रम में किफायती जेनेरिक दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 28 जुलाई 2026 तक NVHCP के तहत 21 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी थी और 1,153 उपचार केंद्रों पर लगभग 6.12 लाख मरीजों को उपचार दिया गया था।
अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जुड़ाव
हेपेटाइटिस के खिलाफ भारत की रणनीति को कई अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। इसमें प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रम, राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम, राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम और रक्त आधान सेवाएं शामिल हैं।
इन लिंकages का लाभ यह है कि स्क्रीनिंग और रेफरल की प्रक्रिया अलग-अलग मंचों पर एक साथ चल सकती है। इससे जोखिम वाले समूहों तक पहुंच बढ़ती है और संक्रमण की शुरुआती पहचान आसान होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- विश्व हेपेटाइटिस दिवस हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है।
- हेपेटाइटिस बी का टीका भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम का हिस्सा है।
- हेपेटाइटिस सी के लिए टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह एंटीवायरल उपचार से ठीक हो सकता है।
- सतत विकास लक्ष्य 3.3 का संबंध 2030 तक प्रमुख संक्रामक रोगों के उन्मूलन से है।
भारत का यह लक्ष्य सार्वजनिक स्वास्थ्य, समय पर जांच, टीकाकरण और उपचार तक समान पहुंच पर आधारित है। 2030 तक हेपेटाइटिस बी और सी के खतरे को कम करने में कार्यक्रम की निरंतरता और राज्यों की सक्रिय भागीदारी निर्णायक भूमिका निभाएगी।