11 साल की बोधना शिवानंदन बनीं शतरंज की सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर

11 साल की बोधना शिवानंदन बनीं शतरंज की सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर

ब्रिटेन की भारतीय मूल की शतरंज खिलाड़ी बोधना शिवानंदन ने 11 वर्ष की उम्र में इतिहास रचते हुए सबसे कम उम्र की महिला ग्रैंडमास्टर बनने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। उन्होंने 28 सितंबर 2026 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 46वें शतरंज ओलंपियाड में अपना तीसरा और अंतिम WGM नॉर्म हासिल किया।

समरकंद में मिला निर्णायक नॉर्म

बोधना ने इस प्रतियोगिता में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और सभी 11 राउंड में शीर्ष बोर्ड पर खेलीं। उन्होंने कुल आठ अंक बनाए, जिससे उन्हें न सिर्फ अंतिम महिला ग्रैंडमास्टर नॉर्म मिला, बल्कि एक और अंतरराष्ट्रीय मास्टर नॉर्म भी हासिल हुआ। शतरंज में नॉर्म किसी खिलाड़ी के प्रदर्शन का मानक होता है, जिसे तय स्तर तक पहुंचने पर शीर्षक के लिए मान्यता मिलती है।

महिला ग्रैंडमास्टर खिताब क्यों खास है

महिला ग्रैंडमास्टर (WGM) खिताब अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ FIDE द्वारा दिया जाता है और यह महिलाओं के लिए मान्यता प्राप्त शीर्ष खिताबों में से एक है। यह ओपन वर्ग के ग्रैंडमास्टर और इंटरनेशनल मास्टर खिताबों से नीचे आता है, लेकिन महिला शतरंज में इसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है। खिलाड़ी को यह खिताब पाने के लिए तय नॉर्म पूरे करने के साथ FIDE की रेटिंग शर्त भी पूरी करनी होती है।

रिकॉर्ड, पृष्ठभूमि और उपलब्धियां

बोधना शिवानंदन ने इससे पहले भी कई उम्र-आधारित रिकॉर्ड बनाए हैं। जुलाई 2025 में वह 10 वर्ष की उम्र में महिला ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल करने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बनी थीं। अगस्त 2025 में उन्होंने ग्रैंडमास्टर पीटर वेल्स को हराकर सबसे कम उम्र की महिला खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया था। अगस्त 2026 में वह ब्रिटिश चेस चैंपियनशिप में ब्रिटेन की सबसे कम उम्र की महिला चैंपियन भी बनीं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • FIDE शतरंज की वैश्विक नियामक संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय खिताब और रेटिंग प्रणाली तय करती है।
  • Chess Olympiad एक द्विवार्षिक टीम शतरंज प्रतियोगिता है, जिसका आयोजन FIDE करती है।
  • 46वां Chess Olympiad उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुआ था।
  • बोधना शिवानंदन ने शतरंज खेलना 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शुरू किया था।

बोधना शिवानंदन की उपलब्धि न केवल ब्रिटेन, बल्कि विश्व शतरंज के लिए भी एक बड़ी कहानी है, क्योंकि इतनी कम उम्र में शीर्ष स्तर के खिताब तक पहुंचना असाधारण प्रतिभा और निरंतर प्रदर्शन का संकेत है।

Originally written on September 29, 2026 and last modified on September 29, 2026.

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