सोरेंग के जैविक मत्स्य क्लस्टर से सिक्किम को नई पहचान
सिक्किम के सोरेंग जिले को 2 नवंबर 2026 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत भारत का पहला जैविक मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किया गया। केंद्रीय मत्स्य मंत्री राजीव रंजन सिंह ने राज्य के दौरे के दौरान इसकी घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य जैविक तरीके से मछली पालन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादन से बाजार तक उसकी पहचान और प्रमाणन की व्यवस्था मजबूत करना है।
जैविक मत्स्य पालन पर जोर
सोरेंग क्लस्टर में मछली पालन के दौरान रसायनों, एंटीबायोटिक दवाओं और कीटनाशकों के उपयोग से बचने पर जोर दिया जाएगा। यहां अमूर कार्प, भारतीय प्रमुख कार्प और ठंडे पानी में पाली जाने वाली ट्राउट जैसी मछलियों का पालन किया जाता है। जैविक उत्पादन की पहचान बनाए रखने के लिए पालन की प्रक्रिया और मछली की आपूर्ति-श्रृंखला का रिकॉर्ड जरूरी है। इससे घरेलू बाजार और निर्यात के लिए जैविक मछली की पहचान तथा उसके उत्पादन की जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।
प्रमाणन और उत्पादन सुविधाओं का विस्तार
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादों के जैविक प्रमाणन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी शुरू की। इसका मकसद प्रमाणन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना और उत्पाद की ट्रेसबिलिटी यानी उसके उत्पादन तथा आपूर्ति का पता लगाने की व्यवस्था विकसित करना है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.75 करोड़ रुपये की मत्स्य अवसंरचना का उद्घाटन किया गया। इसमें मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र, चारा मिल, शीत भंडारण, बायोफ्लॉक इकाइयां और पुनर्चक्रणीय जलीय कृषि प्रणाली शामिल हैं। ये सुविधाएं मछली पालन, उत्पादन के बाद सुरक्षित भंडारण और संसाधन क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।
खरीद व्यवस्था और किसानों को सहायता
सिक्किम सरकार ने स्थानीय स्तर पर पाली गई रेनबो ट्राउट की संस्थागत खरीद के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के साथ समझौता ज्ञापन किया। ऐसी खरीद व्यवस्था से उत्पादकों को एक निश्चित संस्थागत खरीदार तक पहुंच मिल सकती है। कार्यक्रम में मत्स्य पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड और वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए गए। राज्य के मत्स्य मंत्री पूरन कुमार गुरंग और केंद्रीय मत्स्य सचिव अभिलक्ष लिखी भी उपस्थित थे। देशभर में अब तक मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण से जुड़े 34 क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं; इनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक क्लस्टर शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: यह योजना मत्स्य क्षेत्र में बीज उत्पादन, चारा, बाजार और प्रसंस्करण जैसी सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता देती है।
- बायोफ्लॉक प्रणाली: इसमें कार्बन मिलाने से जीवाणु नाइट्रोजन को अवशोषित करते हैं और ऐसा जैव-द्रव्य बनता है, जो पाली जा रही मछलियों या अन्य जलीय जीवों के भोजन में काम आता है।
- किसान क्रेडिट कार्ड: मत्स्य पालक भी खेती से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस व्यवस्था के तहत ऋण सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
- क्लस्टर मॉडल: इसमें संबंधित उत्पादकों और सुविधाओं को एक क्षेत्र में जोड़कर उत्पादन तथा प्रसंस्करण को व्यवस्थित किया जाता है।
सोरेंग की अधिसूचना जैविक मत्स्य उत्पादन के लिए प्रमाणन, बुनियादी ढांचे और बाजार संपर्क को एक साथ मजबूत करने की पहल है। इससे सिक्किम के मत्स्य पालकों को स्थानीय उत्पादन के लिए नई संस्थागत पहुंच मिल सकती है।