साइबर सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र की नई पहल: भारत के लिए नेतृत्व का अवसर

27 वर्षों की कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में एक नई वैश्विक पहल — ग्लोबल मेकेनिज्म फॉर साइबरस्पेस (GM) — की शुरुआत की है। यह मंच साइबरस्पेस में जिम्मेदार राज्य व्यवहार को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों, विश्वास-निर्माण उपायों और क्षमतावर्धन पर ध्यान केंद्रित करता है। GM की स्थापना 11 जुलाई को ओपन-एंडेड वर्किंग ग्रुप (OEWG) की सहमति के आधार पर हुई, जिसमें सभी 193 सदस्य देशों की भागीदारी रही।

GM की पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय महत्व

साइबर कूटनीति के क्षेत्र में 2004 से 2017 तक चला ग्रुप ऑफ गवर्नमेंटल एक्सपर्ट्स (GGE) प्रोसेस सीमित सदस्यता के कारण संकीर्ण परिणाम दे सका। इसके विपरीत, 2018 में शुरू हुआ OEWG सभी देशों के लिए खुला मंच बना, जिसने GM जैसे स्थायी ढांचे की नींव रखी। यह सहमति इस स्वीकार्यता पर आधारित थी कि साइबर अपराध सीमाओं, राजनीतिक प्रणालियों और वैचारिक भिन्नताओं की परवाह किए बिना पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं।

भारत की भूमिका और संभावनाएँ

भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और एक प्रमुख प्रौद्योगिकी शक्ति भी है, GM की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत ने OEWG की चर्चाओं में समावेशी शासन, संतुलित डिजिटल संप्रभुता और क्षमतावर्धन पर विशेष बल दिया। भारत के घरेलू डिजिटल परिवर्तन — जैसे आधार, यूपीआई और डिजिटल इंडिया — ने वैश्विक मंच पर उसकी साख को और मज़बूत किया है।

वैश्विक दक्षिण के लिए भारत का नेतृत्व

GM की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह विकासशील देशों की डिजिटल विभाजन की चुनौतियों को कैसे सुलझाता है। भारत, जिसने तकनीकी उत्पादकता और विकासशील अर्थव्यवस्था दोनों रूपों में अनुभव अर्जित किया है, इन प्रयासों का नेतृत्व कर सकता है।
भारत का IT सेक्टर — जो सॉफ्टवेयर से लेकर साइबर सुरक्षा सेवाओं तक फैला है — पहले से ही हजारों लोगों को प्रशिक्षित कर चुका है। इसका “फ्रुगल इनोवेशन” मॉडल विकासशील देशों को सस्ती और प्रभावी तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने में मददगार हो सकता है। भारत के IITs और तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान इस प्रयास को बड़े पैमाने पर लागू कर सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्लोबल मेकेनिज्म (GM) को 11 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र के OEWG की सहमति से स्थापित किया गया।
  • GM का उद्देश्य साइबरस्पेस में जिम्मेदार राज्य व्यवहार को बढ़ावा देना है।
  • OEWG की प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई और इसमें सभी 193 UN सदस्य देशों को शामिल किया गया।
  • भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रशंसा मिली है।

GM की स्थापना अंतरराष्ट्रीय साइबर शासन में एक ऐतिहासिक मोड़ है। लेकिन इसका असली परीक्षण अब शुरू होता है — क्या राजनीतिक सहमति वास्तविक व्यवहार में बदलेगी? क्या स्वैच्छिक मानदंडों के लिए अनुपालन तंत्र विकसित होंगे? क्या क्षमतावर्धन से ज़मीनी लाभ मिलेंगे?
इन चुनौतियों के समाधान के लिए भारत को अपने तकनीकी, कूटनीतिक और विकास अनुभवों को एकीकृत करते हुए आगे आना होगा। ‘ह्यूमन-सेंट्रिक ग्लोबलाइजेशन’ की भारत की अवधारणा, उभरती तकनीकों के लिए प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय शासन का आधार बन सकती है। GM के ज़रिए भारत के पास अब यह अवसर है कि वह न केवल साइबरस्पेस, बल्कि समूचे तकनीकी भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक बने।

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