सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों की वापसी का आदेश

सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों की वापसी का आदेश

सऊदी अरब में हूती हमलों के तेज होने के बाद अमेरिका ने रियाद स्थित अपने दूतावास से गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। यह कदम सुरक्षा जोखिमों के आकलन के बाद उठाया गया है। आदेश सभी अमेरिकी नागरिकों पर लागू नहीं होता और फिलहाल इसका दायरा केवल सऊदी अरब तक सीमित है।

नागरिक ठिकानों और अहम ढांचे पर हमले

यमन में सक्रिय और ईरान से संबद्ध हूती मिलिशिया ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के नागरिक हवाई अड्डों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है। हमलों में रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और सऊदी अरामको का शायबा तेल क्षेत्र शामिल हैं। हवाई अड्डे पर हुए हमले को सऊदी अरब में कई वर्षों का सबसे घातक हमला बताया गया।

21 अक्टूबर को एक तेल प्रतिष्ठान पर ड्रोन हमले में फिलीपींस और नेपाल के एक-एक नागरिक की मौत हुई, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए। इन घटनाओं से ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिक परिवहन केंद्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

आदेश का दायरा और अमेरिकी चेतावनी

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों की वापसी का आदेश केवल सऊदी अरब के लिए है। इससे पहले कुछ खबरों में अन्य खाड़ी देशों से भी अमेरिकी कर्मियों को हटाए जाने की आशंका जताई गई थी। यह आदेश गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए है, न कि सऊदी अरब में रह रहे सभी अमेरिकी नागरिकों के लिए।

रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा चेतावनी जारी की है। इसमें हवाई अड्डों पर संभावित हमलों और यात्रा में व्यवधान की आशंका बताई गई है। सऊदी अरब में किसी भी हवाई अड्डे का उपयोग करने के लिए अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों को विशेष अनुमति लेने को कहा गया है। विदेश विभाग ने यह भी चेताया कि संघर्ष मौजूदा क्षेत्र से आगे तेजी से फैल सकता है।

यमन संघर्ष की पृष्ठभूमि

यह सुरक्षा कदम यमन के गृहयुद्ध में चार साल से जारी संघर्षविराम के जून 2026 में टूटने के बाद आया है। इसके बाद लड़ाई फिर शुरू हुई और क्षेत्रीय तनाव बढ़ा। यमन का संघर्ष अब केवल देश के भीतर तक सीमित चिंता नहीं रहा; पड़ोसी देशों के नागरिक ठिकानों और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की आशंका ने सुरक्षा हालात को और संवेदनशील बनाया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास, सऊदी अरब में अमेरिका का आधिकारिक राजनयिक मिशन है।
  • अमेरिकी आदेश गैर-आपातकालीन सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए था; सभी अमेरिकी नागरिकों के लिए नहीं।
  • 21 अक्टूबर 2026 के ड्रोन हमले में फिलीपींस और नेपाल के एक-एक नागरिक की मौत हुई तथा दो लोग घायल हुए।
  • यमन के गृहयुद्ध में चार वर्ष का संघर्षविराम जून 2026 में टूट गया।

अमेरिकी कदम सऊदी अरब में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के प्रति सावधानी दर्शाता है। हालात का असर हवाई यात्रा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।

Originally written on October 22, 2026 and last modified on October 22, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *