लाहौल-स्पीति में ग्लेशियर पिघलने से आई फ्लैश फ्लड, मनाली-लेह हाईवे प्रभावित

लाहौल-स्पीति में ग्लेशियर पिघलने से आई फ्लैश फ्लड, मनाली-लेह हाईवे प्रभावित

हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में 29 जून 2026 की दोपहर अचानक आई फ्लैश फ्लड से जनजीवन और यातायात प्रभावित हुआ। यह बाढ़ झलमा नाला में ग्लेशियर के पिघले पानी के अचानक बढ़ जाने के कारण आई, जिससे मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा बह गया। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण 50 से अधिक पर्यटक वाहन मार्ग में फंस गए। घटना के बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और स्थानीय प्रशासन ने तत्काल राहत एवं सड़क बहाली का कार्य शुरू किया। राहत कार्यों के बाद 30 जून 2026 की मध्यरात्रि तक मार्ग को पुनः यातायात के लिए खोल दिया गया।

फ्लैश फ्लड क्या होती है?

फ्लैश फ्लड ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ होती है, जिसमें बहुत कम समय में जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। इसका कारण तीव्र वर्षा, बादल फटना, भूस्खलन, या बर्फ एवं ग्लेशियरों से अचानक बड़ी मात्रा में पानी का बहाव हो सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान ग्लेशियरों और हिम क्षेत्रों के पिघलने से नदियों और नालों में जल प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे अचानक बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है।

झलमा नाला और मनाली-लेह हाईवे का महत्व

झलमा नाला लाहौल-स्पीति क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण जल निकासी मार्ग है। वहीं मनाली-लेह हाईवे हिमाचल प्रदेश को लद्दाख से जोड़ने वाला अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक एवं पर्यटन मार्ग है। इस मार्ग का उपयोग नागरिकों के साथ-साथ भारतीय सशस्त्र बलों की आवाजाही और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए भी किया जाता है। सड़क का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से यातायात अस्थायी रूप से बाधित हो गया, लेकिन समय रहते बहाली कार्य पूरा कर लिया गया।

प्रशासन और बीआरओ की त्वरित कार्रवाई

घटना के तुरंत बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में आपातकालीन मरम्मत कार्य शुरू किया। मशीनों और तकनीकी दलों की सहायता से क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत की गई, जिसके बाद 30 जून 2026 की मध्यरात्रि तक मनाली-लेह हाईवे पर यातायात फिर से शुरू हो गया। इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं मिली, जिससे राहत कार्य और भी प्रभावी साबित हुए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • लाहौल-स्पीति हिमाचल प्रदेश का उच्च हिमालयी जिला है, जिसे शीत मरुस्थलीय (कोल्ड डेजर्ट) क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।
  • सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) भारत के सीमावर्ती और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के निर्माण एवं रखरखाव का कार्य करता है।
  • मनाली-लेह हाईवे पश्चिमी हिमालय का एक महत्वपूर्ण सामरिक और पर्यटन मार्ग है।
  • हिमालयी क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड का प्रमुख कारण ग्लेशियर पिघलना, हिमपात का पिघलना, बादल फटना और संकरे पर्वतीय जलमार्गों में तेज़ जल प्रवाह होता है।

लाहौल-स्पीति की यह घटना हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम को दर्शाती है। समय पर राहत एवं सड़क बहाली कार्य के कारण यातायात जल्द बहाल हो गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर निगरानी, मजबूत आधारभूत ढांचा और आपदा प्रबंधन प्रणाली भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Originally written on June 30, 2026 and last modified on June 30, 2026.

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