रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे SIDM चैंपियन पुरस्कार

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देंगे SIDM चैंपियन पुरस्कार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेन्स मैन्युफैक्चरर्स (एसआईडीएम) के आठवें वार्षिक सत्र में एसआईडीएम चैंपियन पुरस्कार 2026 प्रदान किए। कुल 15 संगठनों को स्वदेशी तकनीक विकास, उत्पाद नवाचार, डिजाइन, आयात के विकल्प तैयार करने, विनिर्माण क्षमता और निर्यात में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

पुरस्कारों में किन उपलब्धियों को मिली पहचान

पुरस्कारों का केंद्र भारत में रक्षा उत्पादन को मजबूत करने वाली अलग-अलग क्षमताएं रहीं। इनमें स्वदेशी तकनीक और उत्पाद विकसित करना, बेहतर डिजाइन तैयार करना तथा आयातित वस्तुओं के स्थान पर देश में बने उपकरण और पुर्जे उपलब्ध कराना शामिल है। विनिर्माण में उत्कृष्टता और रक्षा उत्पादों के निर्यात को भी मान्यता दी गई।

एसआईडीएम भारतीय रक्षा विनिर्माताओं का उद्योग संगठन है। भारत का रक्षा विनिर्माण क्षेत्र सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से मिलकर बना है। ये संस्थाएं सशस्त्र बलों के लिए उपकरणों और उनके घटकों का उत्पादन करती हैं। ऐसे पुरस्कार उद्योग के अलग-अलग हिस्सों की उपलब्धियों को सामने लाने का अवसर देते हैं।

स्वदेशी खरीद और अनुसंधान पर जोर

समारोह में राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने और उत्पादन क्षमता का विस्तार करने की जरूरत बताई। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास से नई तकनीकों, उत्पादों और प्रक्रियाओं का विकास होता है। इन क्षेत्रों में क्षमता बढ़ने से देश में रक्षा उपकरणों के डिजाइन और निर्माण को बल मिल सकता है।

रक्षा मंत्रालय की पूंजीगत खरीद के लिए रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 प्रमुख ढांचा है। इसमें ‘खरीदें (भारतीय-आईडीडीएम)’ जैसी श्रेणी शामिल है। आईडीडीएम का अर्थ है स्वदेश में डिजाइन, विकसित और निर्मित। प्रक्रिया में भारतीय खरीद तथा स्वदेशी डिजाइन और उत्पादन को जगह दी गई है। आयात का विकल्प तैयार करने का अर्थ है ऐसी वस्तुओं या तकनीकों का भारत में विकास और उत्पादन करना, जिन्हें पहले विदेश से खरीदा जाता था।

निर्यात में वृद्धि और आगे का लक्ष्य

भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2025–26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि थी। सरकार ने 2029 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा अब इस क्षमता पर अधिक निर्भर करती है कि भारत अपने रक्षा बलों के लिए जरूरी तकनीक और उपकरणों का डिजाइन, विकास, निर्माण और नियंत्रण स्वयं कर सके। घरेलू उत्पादन और निर्यात में बढ़ोतरी इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एसआईडीएम चैंपियन पुरस्कार 2026 समारोह 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
  • पुरस्कार एसआईडीएम के आठवें वार्षिक सत्र के दौरान प्रदान किए गए और कुल 15 संगठनों को सम्मानित किया गया।
  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में ‘खरीदें (भारतीय-आईडीडीएम)’ श्रेणी शामिल है।
  • वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये रहा; 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य है।

पुरस्कारों के जरिए स्वदेशी नवाचार और उत्पादन में योगदान को रेखांकित किया गया। निजी क्षेत्र, अनुसंधान और घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता तथा निर्यात लक्ष्य हासिल करने के लिए अहम होगा।

Originally written on October 10, 2026 and last modified on October 10, 2026.

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