म्यांमार की सैन्य सरकार ने करेन नेशनल यूनियन को आतंकवादी संगठन घोषित किया: क्या है इसका निहितार्थ?

28 अगस्त, 2025 को म्यांमार की सैन्य सरकार ने करेन नेशनल यूनियन (KNU) को आधिकारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। इस निर्णय के तहत अब KNU से जुड़ी किसी भी गतिविधि को अवैध माना जाएगा, जिसमें तृतीय पक्षों द्वारा संपर्क करना भी शामिल है। यह कदम देश में जारी गृहयुद्ध और आगामी राष्ट्रीय चुनावों को लेकर बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है।
KNU: दशकों पुराना संघर्ष
KNU म्यांमार के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जातीय विद्रोही संगठन है, जो 1948 में ब्रिटिश उपनिवेश से आज़ादी के बाद से ही अधिक स्वायत्तता के लिए संघर्षरत है। इस संगठन की सैन्य शाखा, करेन नेशनल लिबरेशन आर्मी (KNLA), खासतौर पर 2021 की सैन्य तख्तापलट के बाद उभरे सशस्त्र संघर्ष में सक्रिय रही है।
सैन्य तख्तापलट के बाद शांतिपूर्ण विरोधों को बलपूर्वक कुचलने के बाद कई लोकतांत्रिक समर्थक समूहों ने हथियार उठाए, और KNU ने इन समूहों को प्रशिक्षण और शरण देकर समर्थन दिया।
आतंकवादी घोषित करने के पीछे का कारण
सरकारी टीवी चैनल MRTV के अनुसार, KNU को आतंकवादी घोषित करने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि उसने “जन सुरक्षा, जीवन और संपत्ति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, और सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की अवसंरचना को क्षति पहुंचाई है।” इसके अलावा, KNU और उससे जुड़े संगठनों को ‘अवैध संगठन’ भी घोषित किया गया है, जिससे इनके साथ किसी भी तरह का संपर्क कानूनी अपराध बन जाता है।
KNU की प्रतिक्रिया और चुनावों का बहिष्कार
KNU के प्रवक्ता पादोह सॉ तॉ नी ने कहा कि उन्हें इस निर्णय की कोई परवाह नहीं है और यह स्पष्ट किया कि म्यांमार की सैन्य सरकार खुद अंतरराष्ट्रीय अपराधों में आरोपी है। KNU पहले ही दिसंबर 28 से शुरू होने वाले चुनावों का बहिष्कार करने और उन्हें विफल करने की बात कह चुका है।
हालांकि, अब इस नए कानून के चलते संगठन की अहिंसक प्रचार गतिविधियाँ भी अवैध घोषित कर दी गई हैं। सैन्य सरकार ने पिछले महीने एक नया चुनाव कानून भी पारित किया, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति चुनाव में व्यवधान डालता है, तो उस पर मृत्युदंड तक लागू हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- KNU 1948 से म्यांमार में स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहा है।
- 2015 में KNU ने म्यांमार की पूर्ववर्ती सरकार के साथ युद्धविराम समझौता किया था।
- 2021 के तख्तापलट के बाद KNU ने लोकतंत्र समर्थक मिलिशियाओं को समर्थन दिया।
- 2025 में सैन्य सरकार ने KNU को ‘आतंकवादी संगठन’ और ‘अवैध संगठन’ घोषित किया।
- सैन्य सरकार ने विरोध करने वालों के लिए मृत्युदंड वाला चुनाव कानून लागू किया है।
KNU का आतंकवादी संगठन घोषित होना म्यांमार के राजनीतिक संकट को और अधिक जटिल बना देता है। जहां एक ओर चुनावों के ज़रिए सैन्य शासन को वैधता देने का प्रयास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जातीय और लोकतंत्र समर्थक समूहों की असहमति और सशस्त्र संघर्ष बढ़ता जा रहा है। यह कदम देश के लोकतांत्रिक और संघीय भविष्य के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है।