भूटान में मोदी को समर्पित हुआ 76वां बौद्ध स्तूप
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक ने 1 नवंबर 2026 को गेलिफू माइंडफुलनेस सिटी में 76वां बौद्ध स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित किया। यह आयोजन माउ छू (आइ) नदी के किनारे 108 स्तूपों की स्थापना और धार्मिक प्रतिष्ठा के समारोह का हिस्सा था। भारत की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने समारोह में भाग लिया और राजा तक मोदी का आभार संदेश पहुंचाया।
नौ घंटे में खड़े किए गए 108 स्तूप
भूटान के अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक स्तूप 15 मीटर ऊंचा है। करीब 40,000 स्वयंसेवकों ने लगभग नौ घंटे में इन स्तूपों का निर्माण किया। ये स्तूप असम की सीमा के निकट माउ छू नदी के किनारे बनाए गए हैं। इन्हें जांगचुब चोर्टेन या ‘ज्ञानोदय के स्तूप’ भी कहा जाता है।
इनमें से 76वें स्तूप को मोदी के नाम समर्पित करने का कारण उनकी आयु से जुड़ा था। अधिकारियों ने बताया कि मोदी ने एक महीने से कुछ अधिक समय पहले 76 वर्ष पूरे किए थे। समारोह ल्हाबाब दुचेन के अवसर पर आयोजित हुआ, जो बौद्ध परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है।
भारत-भूटान मित्रता और गेलिफू की परिकल्पना
स्तूप समर्पण को भारत-भूटान मैत्री मजबूत करने के मोदी के प्रयासों और गेलिफू माइंडफुलनेस सिटी परियोजना के लिए भारत के समर्थन की मान्यता के रूप में देखा गया। भूटान के राजा इस शहर को ऐसा वैश्विक आर्थिक केंद्र बनाना चाहते हैं, जहां आध्यात्मिकता और आर्थिक विकास साथ आगे बढ़ें। परियोजना की परिकल्पना में पर्यावरणीय टिकाऊपन और नागरिकों का कल्याण भी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
गेलिफू को भूटान ने विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के रूप में घोषित किया है। इसका उद्देश्य देश के संवैधानिक ढांचे के भीतर इस क्षेत्र के लिए अलग शासन और आर्थिक व्यवस्थाएं विकसित करना है। ऐसे में यह परियोजना भूटान की विकास रणनीति के साथ-साथ भारत के निकट पड़ोसी के साथ सहयोग का भी अहम पहलू है।
समर्पण का कूटनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
यह आयोजन धार्मिक परंपरा और द्विपक्षीय संबंधों को एक साथ सामने लाता है। भूटान और भारत के बीच सहयोग की रूपरेखा समय के साथ बदली है। 2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि ने 1949 की संधि की उस व्यवस्था को बदला, जिसके तहत भूटान को अपने बाहरी संबंधों में भारत के मार्गदर्शन में चलना था। नई संधि ने करीबी सहयोग पर जोर दिया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तिब्बती बौद्ध परंपरा के आठ प्रमुख स्तूप बुद्ध के जीवन की अलग-अलग घटनाओं की स्मृति में बनाए गए हैं।
- ज्ञानोदय स्तूप बुद्ध के बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने की घटना से जुड़ा है।
- ल्हाबाब दुचेन बुद्ध के त्रायस्त्रिंश स्वर्ग में अपनी माता को उपदेश देने के बाद पृथ्वी पर लौटने की स्मृति में मनाया जाता है।
- 2007 की भारत-भूटान मैत्री संधि ने 1949 की संधि का स्थान लिया और दोनों देशों के बीच निकट सहयोग की व्यवस्था को आधार दिया।
गेलिफू में 108 स्तूपों का निर्माण और 76वें स्तूप का मोदी को समर्पण भूटान की आध्यात्मिक विरासत, उसकी नई विकास परिकल्पना और भारत के साथ मजबूत होते संबंधों का प्रतीक है।