भूटान में पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना का सफल समापन: भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी को नई ऊंचाई

भारत और भूटान के बीच बहुप्रतीक्षित पुनात्सांगचू-II जलविद्युत परियोजना (Punatsangchhu-II Hydroelectric Project – 1020 मेगावाट) का सफल समापन हो गया है। परियोजना की अंतिम यूनिट (यूनिट 6, 170 मेगावाट) के पावर ग्रिड से सफलतापूर्वक समन्वयन के साथ, यह ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई है। यह केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि भारत-भूटान के आपसी विश्वास और क्षेत्रीय सहयोग की मिसाल है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
- कुल क्षमता: 1020 मेगावाट (शुरुआत में 990 MW, बाद में संशोधित)
- स्थान: पुनात्सांगचू नदी, वांगदुए फोडरांग ज़िला, भूटान
- प्रकार: Run-of-the-river जलविद्युत परियोजना (कम विस्थापन, कम जलभराव)
- वित्तपोषण: भारत सरकार द्वारा पूर्ण वित्तपोषण — 30% अनुदान, 70% ऋण (10% वार्षिक ब्याज दर)
- कार्यन्वयन एजेंसी: Punatsangchhu-II Hydroelectric Project Authority (PHPA II)
भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग का विस्तार
पुनात्सांगचू-II परियोजना के साथ अब भूटान की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 40% बढ़कर 3500 मेगावाट से अधिक हो गई है। यह परियोजना भारत और भूटान के बीच चल रही पांचवीं संयुक्त जलविद्युत परियोजना है:
- चुखा (336 MW)
- कुरिचु (60 MW)
- ताला (1020 MW)
- मांगदेचू (720 MW)
- पुनात्सांगचू-II (1020 MW)
इसके अलावा, 1200 मेगावाट की पुनात्सांगचू-I परियोजना भी कार्यान्वयन में है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- परियोजना का निर्माण दिसंबर 2010 में आरंभ हुआ और कई चुनौतियों के कारण समयसीमा से पीछे रहा।
- कोविड-19, बाढ़, भौगोलिक जटिलताओं और डैम फाउंडेशन में shear zone की खोज से कार्य में देरी हुई।
- निर्माण के दौरान 1.3 अरब यूनिट बिजली उत्पादन से लगभग 4.9 अरब नूगुलट्रम (₹4.9 अरब) की आय अर्जित हुई।
- भारत के WAPCOS ने परियोजना अध्ययन के दौरान डिज़ाइन एवं इंजीनियरिंग सेवाएं दीं।
सामरिक और पर्यावरणीय महत्व
भूटान के प्रधानमंत्री दशो शेरिंग तोबगे और भारत के राजदूत सुधाकर दलेला की उपस्थिति में समारोह आयोजित हुआ। इस अवसर ने न केवल ऊर्जा सहयोग की मजबूती को दर्शाया, बल्कि हरित ऊर्जा (Green Energy) की दिशा में भारत-भूटान की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।
पूर्व राजदूत वी.पी. हरन के अनुसार, “पुनात्सांगचू-II जैसे हरित ऊर्जा प्रोजेक्ट सतत विकास की दिशा में ठोस कदम हैं। इसमें कम जनविस्थापन और न्यूनतम पारिस्थितिक प्रभाव रहा है।”
निष्कर्ष
पुनात्सांगचू-II परियोजना का सफल समापन भारत-भूटान संबंधों में ऊर्जा सहयोग को नई ऊंचाई प्रदान करता है। यह परियोजना न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में मील का पत्थर है, बल्कि दक्षिण एशिया में साझा संसाधनों को सामरिक संपत्ति में बदलने की प्रेरणादायक मिसाल भी है। जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी परियोजनाएं क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लिए नीतिगत दिशा दर्शाती हैं।