भारत में 1,211 पक्षी प्रजातियों का संरक्षण आकलन शुरू

भारत में 1,211 पक्षी प्रजातियों का संरक्षण आकलन शुरू

भारत ने नियमित रूप से पाई जाने वाली 1,211 पक्षी प्रजातियों की राष्ट्रीय रेड लिस्ट समीक्षा शुरू की है। इसमें देश में रहने वाले और प्रवासी, दोनों प्रकार के पक्षी शामिल हैं। यह आकलन अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रूपरेखा के अनुसार किया जा रहा है।

पक्षियों की स्थिति का राष्ट्रीय आकलन

19 अक्टूबर 2026 तक 107 प्रजातियों का प्रारंभिक आकलन पूरा हो चुका था। सभी 1,211 प्रजातियों पर प्रारंभिक काम 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि अंतिम आकलन 2027 के अंत तक आने की अपेक्षा है। इसलिए अभी सामने आए संरक्षण वर्गीकरण को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

प्रारंभिक प्रस्तावों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को ‘अति संकटग्रस्त’ और भारतीय नीलकंठ को ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में रखने की बात है। सारस को ‘संकटग्रस्त’ तथा मार्बल्ड डक, व्हाइट-थ्रोटेड बुशचैट और पलास फिश-ईगल को ‘अति संकटग्रस्त’ के बजाय ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी में प्रस्तावित किया गया है। ग्रे प्लोवर को ‘कम चिंता’ वाली श्रेणी में रखने का सुझाव है। ये सभी प्रस्ताव अभी अंतिम समीक्षा के अधीन हैं।

आकलन में किन प्रमाणों का उपयोग होगा

किसी प्रजाति की स्थिति तय करने के लिए उसके भौगोलिक विस्तार, आबादी के आकार और आबादी में समय के साथ हो रहे बदलावों को देखा जाता है। भारत की कई पक्षी प्रजातियों की आबादी के आकार का अनुमान उपलब्ध नहीं है, इसलिए उपलब्ध प्रमाणों और आंकड़ों का समेकित उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

यह काम भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, आईयूसीएन की प्रजाति अस्तित्व केंद्र-भारत तथा वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और ‘स्टेट ऑफ इंडियाज बर्ड्स’ पहल के सहयोग से हो रहा है। इस पहल में नागरिक-विज्ञान से मिले आंकड़े भी शामिल किए जाते हैं। आम लोगों द्वारा पक्षियों के देखे जाने और दर्ज किए जाने से व्यापक रूप से मिलने वाली प्रजातियों की आबादी के रुझान समझने में मदद मिलती है।

राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप से जुड़ा लक्ष्य

भारत ने 2025 में अबू धाबी में आयोजित आईयूसीएन विश्व संरक्षण कांग्रेस में राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप और विजन 2025–2030 प्रस्तुत किया था। इसका लक्ष्य 2030 तक वनस्पतियों, जीवों और कवकों की 11,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन करना है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इस पहल का नेतृत्व कर रहा है। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, आईयूसीएन इंडिया और आईयूसीएन की प्रजाति अस्तित्व केंद्र-भारत सहित कई संस्थाएं इसमें सहयोग कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईयूसीएन की संकटग्रस्त प्रजातियों की रेड लिस्ट की शुरुआत 1964 में हुई थी।
  • ‘अति संकटग्रस्त’, ‘संकटग्रस्त’ और ‘असुरक्षित’—ये तीन श्रेणियां संकटग्रस्त श्रेणियों में गिनी जाती हैं।
  • प्रजातियों के आकलन में भौगोलिक विस्तार, आबादी का आकार और आबादी के रुझान प्रमुख प्रमाण हैं।
  • भारत के राष्ट्रीय रेड लिस्ट रोडमैप का लक्ष्य 2030 तक 11,000 से अधिक प्रजातियों का आकलन करना है।

यह समीक्षा देश की पक्षी जैव विविधता और संरक्षण की प्राथमिकताओं को समझने के लिए आधार तैयार करेगी। इसके निष्कर्ष तभी अंतिम माने जाएंगे जब सभी आकलन पूरे होकर जारी होंगे।

Originally written on October 20, 2026 and last modified on October 20, 2026.

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