भारत-उज्बेकिस्तान की आतंकवाद विरोधी साझेदारी को नई मजबूती

भारत-उज्बेकिस्तान की आतंकवाद विरोधी साझेदारी को नई मजबूती

भारत और उज्बेकिस्तान ने आतंकवाद से मुकाबले में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में 22 अक्टूबर 2026 को दोनों देशों के संयुक्त कार्यदल की 10वीं बैठक हुई। इसमें सूचना साझा करने, क्षमता निर्माण और प्रभावी तौर-तरीकों के आदान-प्रदान पर जोर दिया गया।

आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर चर्चा

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में आतंकवाद-रोधी मामलों के अतिरिक्त सचिव डॉ. सुहेल एजाज खान और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी पिरिमकुलोव गुलोमजोन शोद्मोनकुलोविच ने की। दोनों पक्षों ने वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा की। चर्चा में उग्रवाद, कट्टरपंथ, आतंकवाद के लिए धन जुटाने और आतंकवादी गतिविधियों में प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे।

प्रतिनिधियों ने अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संभावित संबंधों पर भी विचार किया। यह सहयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आतंकवादी नेटवर्क सीमापार संपर्कों और वित्तीय माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। सूचना का समय पर आदान-प्रदान और जांच व रोकथाम की क्षमता बढ़ाना ऐसे खतरों से निपटने में मददगार हो सकता है।

नियमित संवाद और रणनीतिक साझेदारी

संयुक्त कार्यदल की पिछली, यानी 9वीं बैठक 30 सितंबर 2025 को ताशकंद में हुई थी। उस बैठक में भारत और उज्बेकिस्तान ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए आतंकवादी हमले की निंदा की थी। कार्यदल की अगली बैठक उज्बेकिस्तान में दोनों पक्षों की सुविधा के अनुसार आयोजित की जाएगी।

अगस्त 2026 में भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया। इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों में रक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और साइबर सुरक्षा शामिल हैं। सैन्य सहयोग के तहत दोनों देशों के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘दुस्तलिक’ का सातवां संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज्बेकिस्तान के गुरुमसराय क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित हुआ।

बहुपक्षीय मंचों पर साझा प्रयास

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे और धन शोधन तथा आतंकवाद के वित्तपोषण से मुकाबले वाले यूरेशियाई समूह में सहयोग जारी रखने की पुष्टि की। शंघाई सहयोग संगठन का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचा सदस्य देशों के बीच आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के विरुद्ध समन्वय करता है। यूरेशियाई समूह धन शोधन और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से निपटने वाला क्षेत्रीय अंतर-सरकारी निकाय है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 2001 में हुई थी और भारत 2017 में इसका पूर्ण सदस्य बना।
  • शंघाई सहयोग संगठन का क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचा ताशकंद, उज्बेकिस्तान में स्थित है।
  • यूरेशियाई समूह की स्थापना 2004 में हुई थी। यह वित्तीय कार्रवाई कार्यबल जैसी क्षेत्रीय संस्था है।
  • ‘दुस्तलिक’ भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आयोजित होने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास है।

नई रणनीतिक साझेदारी और नियमित संवाद से दोनों देशों के लिए आतंकवादी खतरों की पहचान, रोकथाम और उनसे निपटने में सहयोग बढ़ाने का आधार मजबूत हुआ है।

Originally written on October 23, 2026 and last modified on October 23, 2026.

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