भारत-अमेरिका युध अभ्यास में दो-थिएटर रणनीति से बढ़ी सैन्य तालमेल की अहमियत
भारत और अमेरिका की वार्षिक संयुक्त सैन्य कवायद युध अभ्यास का 22वां संस्करण 9 सितंबर से 28 सितंबर 2026 तक दो-थिएटर प्रारूप में आयोजित किया जा रहा है। इस बार अभ्यास का एक चरण राजस्थान के बीकानेर और दूसरा उत्तराखंड के औली में हो रहा है। अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में प्रशिक्षण का यह मॉडल दोनों सेनाओं के बीच सामरिक तालमेल, त्वरित समन्वय और बहु-क्षेत्रीय युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेगिस्तान से लेकर ऊंचाई वाले इलाके तक प्रशिक्षण
राजस्थान चरण महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया जा रहा है, जहां रेगिस्तानी और खुले मैदान वाले युद्धाभ्यास पर फोकस है। दूसरी ओर औली में होने वाला चरण लगभग 2,500 मीटर की ऊंचाई पर है और यह चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित है। इस तरह अभ्यास में मरुस्थलीय और पर्वतीय, दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कराई जा रही है।
युध अभ्यास का उद्देश्य केवल संयुक्त ड्रिल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें टैक्टिकल मूवमेंट, फील्ड ऑपरेशंस और दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी यानी एक-दूसरे के साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करने की क्षमता को परखा जाता है।
कौन-कौन से हथियार और इकाइयां शामिल हैं
इस अभ्यास में लगभग 700 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं, जिनमें भारत और अमेरिका के 350-350 जवान शामिल हैं। अमेरिकी पक्ष से 11वीं एयरबोर्न डिवीजन के आर्कटिक-प्रशिक्षित सैनिक और 3rd Multi-Domain Task Force हिस्सा ले रहे हैं। यह टुकड़ी बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिए जानी जाती है, जिसमें जमीन, हवा और अन्य डोमेन के बीच समन्वय पर जोर होता है।
इस बार AH-64E अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर भी पहली बार युध अभ्यास का हिस्सा बने हैं। इन हेलीकॉप्टरों में हेलफायर मिसाइलें, 70 मिमी रॉकेट और 30 मिमी चेन गन लगी होती हैं। राजस्थान चरण में भारत के पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और K9 वज्र होवित्जर के साथ अमेरिकी HIMARS प्रणाली का भी उपयोग किया जा रहा है।
माउंटेन वारफेयर और ड्रोन-रोधी तैयारी पर फोकस
औली चरण में M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्जर भी शामिल हैं, जिन्हें चिनूक हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट किया गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में इस तरह की तैनाती से सेना की तेज़ी से तैनाती और भारी हथियारों के संचालन की क्षमता का परीक्षण होता है।
अभ्यास का एक अहम हिस्सा अनमैन्ड एरियल सिस्टम यानी UAS की पहचान और जामिंग भी है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए ड्रोन-रोधी प्रशिक्षण दोनों सेनाओं के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी माना जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- युध अभ्यास भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच होने वाला वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
- महाजन फील्ड फायरिंग रेंज राजस्थान में स्थित है और रेगिस्तानी युद्ध प्रशिक्षण के लिए उपयोग होती है।
- औली उत्तराखंड का ऊंचाई वाला प्रशिक्षण क्षेत्र है, जहां पर्वतीय युद्धाभ्यास कराए जाते हैं।
- HIMARS का पूरा नाम High Mobility Artillery Rocket System है।
इस अभ्यास में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और अमेरिकी सेना प्रशांत के डिप्टी कमांडिंग जनरल लेफ्टिनेंट जनरल जोएल “JB” वॉवेल के प्रमुख चरणों में शामिल होने की भी योजना है। दो अलग-अलग थिएटर में होने वाला यह अभ्यास भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग की बढ़ती गहराई को दर्शाता है।