ब्रह्मोस निर्यात ने भारत की रक्षा शक्ति को नई ऊंचाई दी
भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का निर्यात 600 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंचने का अनुमान है। फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया से जुड़े सौदों ने इस उपलब्धि को संभव बनाया है। यह केवल एक निर्यात सफलता नहीं, बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और रणनीतिक साझेदारी का भी संकेत है।
ब्रह्मोस क्यों खास है
ब्रह्मोस भारत और रूस की संयुक्त परियोजना है और इसे दुनिया की तेज़ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है। इसकी तैनाती भूमि, समुद्र और वायु—तीनों प्लेटफॉर्म पर की जा सकती है। वायु-प्रक्षेपित संस्करण को सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ा गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता और उपयोगिता बढ़ती है।
रक्षा निर्यात के लिहाज से ब्रह्मोस भारत के लिए एक प्रमुख उत्पाद बनकर उभरा है। इसकी तकनीकी विश्वसनीयता और बहु-भूमिका क्षमता ने इसे विदेशी खरीदारों के लिए आकर्षक बनाया है, खासकर समुद्री सुरक्षा और तटीय रक्षा की जरूरतों वाले देशों के लिए।
दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती मांग
ब्रह्मोस से जुड़े प्रमुख विदेशी बाजार फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया हैं। ये तीनों देश समुद्री दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित हैं, जहां तटीय सुरक्षा, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और जहाज-रोधी क्षमता रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक बना था। जनवरी 2022 में उसने तीन बैटरियों वाले शोर-आधारित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम के लिए समझौता किया था। अब तक फिलीपींस को लगभग 330 मिलियन डॉलर मूल्य की ब्रह्मोस प्रणालियां मिल चुकी हैं। वियतनाम और इंडोनेशिया के लिए शुरुआती निर्यात क्रमशः लगभग 100 मिलियन डॉलर और 200 मिलियन डॉलर आंका गया है।
भारत के रक्षा निर्यात के लिए संकेत
ब्रह्मोस का बढ़ता निर्यात भारत के व्यापक रक्षा निर्यात अभियान की सफलता को भी दर्शाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष के 23,622 करोड़ रुपये की तुलना में 62.66 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि बताती है कि भारत अब केवल आयातक नहीं, बल्कि उभरता हुआ रक्षा निर्यातक भी बन रहा है।
ऐसे सौदे भारत की तकनीकी साख, उत्पादन क्षमता और अंतरराष्ट्रीय भरोसे को मजबूत करते हैं। साथ ही, वे भविष्य में और देशों के लिए भारतीय रक्षा प्रणालियों के दरवाजे खोल सकते हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ब्रह्मोस भारत और रूस की संयुक्त रूप से विकसित सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
- फिलीपींस ब्रह्मोस का पहला विदेशी ग्राहक बना था और उसने जनवरी 2022 में समझौता किया था।
- फिलीपींस के सौदे में तीन बैटरियों वाला शोर-आधारित एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम शामिल था।
- ब्रह्मोस का वायु-प्रक्षेपित संस्करण सुखोई लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया गया है।
ब्रह्मोस निर्यात का 600 मिलियन डॉलर के पार जाना भारत की रक्षा कूटनीति और औद्योगिक क्षमता दोनों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह संकेत देता है कि भारतीय रक्षा उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अधिक मजबूत पहचान बना रहे हैं।