बीएफआई में प्रशासनिक विवाद: जांच तक सचिव महासचिव निलंबित
भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने 13 अक्टूबर 2026 को महासचिव प्रमोद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई वित्तीय अनियमितताओं, जांच में सहयोग न करने और अधिकारों के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की जांच लंबित रहने तक अंतरिम कदम के रूप में की गई है। आदेश में इसे आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं बताया गया है।
निलंबन के पीछे क्या आरोप हैं
प्रमोद कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्रसारण व्यवस्था के लिए आवश्यक मंजूरी के बिना कार्यादेश जारी किया। उन पर राष्ट्रीय चैंपियनशिप रद्द किए जाने के मामले की जांच में सहयोग न करने का आरोप भी है। एक अन्य आरोप के अनुसार, उन्होंने बीएफआई अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए अनधिकृत बैठक बुलाने की कोशिश की। इन सभी बिंदुओं की जांच होनी है और फिलहाल इन्हें सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।
दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग
निलंबन से एक दिन पहले, 12 अक्टूबर को कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अजय सिंह और बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक पर आरोप लगाया था। कुमार का दावा था कि उनके प्रस्तावित अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिए उन्हें “आपराधिक धमकी” दी गई। मलिक ने 13 अक्टूबर को इस आरोप को निराधार बताया। यह आरोप-प्रत्यारोप निलंबन आदेश में दर्ज आरोपों की जांच से अलग है; दोनों मामलों पर किसी निष्कर्ष को पहले से तय नहीं माना जाना चाहिए।
खेल महासंघों की जवाबदेही का सवाल
बीएफआई भारत में मुक्केबाजी का राष्ट्रीय शासी निकाय है। राष्ट्रीय खेल महासंघ अपने खेलों के प्रशासन और प्रतियोगिताओं के आयोजन या निगरानी की जिम्मेदारी निभाते हैं। उनका कामकाज अपने संविधान और लागू खेल-प्रशासन संबंधी नियमों के अनुरूप होना चाहिए। इस प्रकरण में जांच का नतीजा यह स्पष्ट करेगा कि लगाए गए आरोपों के संबंध में आगे क्या कार्रवाई उचित होगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय मुक्केबाजी महासंघ भारत में मुक्केबाजी का राष्ट्रीय शासी निकाय है।
- भारत की राष्ट्रीय खेल महासंघों से जुड़ी व्यवस्था के लिए राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 मार्गदर्शक प्रावधानों में शामिल है।
- मुक्केबाजी 1904 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में शामिल थी और 1912 के खेलों को छोड़कर इसके बाद के हर ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में रही।
- अजय सिंह बीएफआई के अध्यक्ष हैं; निलंबन से पहले प्रमोद कुमार महासचिव थे।
निलंबन जांच पूरी होने तक लागू अंतरिम कदम है, न कि प्रमोद कुमार के खिलाफ आरोपों पर अंतिम फैसला। मामले में आगे की स्थिति जांच और उसके निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।