पार्किंसन रोग में आंतों के बैक्टीरिया की भूमिका पर नई पड़ताल

पार्किंसन रोग में आंतों के बैक्टीरिया की भूमिका पर नई पड़ताल

कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीयूएसएटी) और श्री चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (एससीटीआईएमएसटी), तिरुवनंतपुरम के शोधकर्ताओं ने केरलम के पार्किंसन रोगियों और स्वस्थ लोगों के आंतों के बैक्टीरिया की तुलना की। अध्ययन में दोनों समूहों के सूक्ष्मजीव समुदायों में अंतर मिला। इसके निष्कर्ष 29 अक्टूबर 2026 को ‘एनपीजे पार्किंसंस डिजीज’ में ऑनलाइन प्रकाशित हुए।

सूजन से जुड़े बैक्टीरिया अधिक, लाभकारी वसा-अम्ल कम

शोधकर्ताओं के अनुसार, पार्किंसन रोगियों में कुछ ऐसे जीवाणु समूह अधिक मात्रा में पाए गए जिनका संबंध सूजन से हो सकता है। इसके विपरीत, लघु-श्रृंखला वसा-अम्ल बनाने वाले बैक्टीरिया का स्तर कम था। ये वसा-अम्ल आंत की अंदरूनी परत को बनाए रखने और प्रतिरक्षा गतिविधियों के नियमन में मदद करते हैं। ब्यूटिरेट, एसीटेट और प्रोपियोनेट इनके उदाहरण हैं। आंतों के सूक्ष्मजीव आहार के रेशे को किण्वित करके इन्हें बनाते हैं।

केरलम के रोगियों पर 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में भी सूजन से जुड़े सूक्ष्मजीव समूहों की अधिकता और सूजन-रोधी समूहों की कमी दर्ज की गई। उसमें डोपामिन, ग्लूटामेट और गामा-अमीनोब्यूटिरिक अम्ल से जुड़ी जैविक प्रक्रियाओं की क्षमता में भी अंतर पाया गया। ये निष्कर्ष आंतों के सूक्ष्मजीवों और तंत्रिका तंत्र के बीच संभावित संबंध को समझने में मदद करते हैं, हालांकि इनसे यह साबित नहीं होता कि बैक्टीरिया में बदलाव ही रोग का कारण हैं।

आंतों के सूक्ष्मजीव और पार्किंसन रोग

आंतों का सूक्ष्मजीव समुदाय पाचन तंत्र में रहने वाले बैक्टीरिया सहित विभिन्न सूक्ष्मजीवों से बनता है। अक्टूबर 2026 में प्रकाशित शोध में पार्किंसन रोगियों में राइबोफ्लेविन यानी विटामिन बी2 और बायोटिन यानी विटामिन बी7 के निर्माण से जुड़े जीनों में कमी का भी उल्लेख किया गया। कुछ अध्ययनों में लघु-श्रृंखला वसा-अम्लों और पॉलियामाइन्स का स्तर कम पाया गया है। ये पदार्थ आंत की अवरोधक परत को बनाए रखने में शामिल होते हैं।

पार्किंसन एक प्रगतिशील तंत्रिका-अपक्षयी रोग है। इसमें मस्तिष्क के सब्स्टैंशिया नाइग्रा क्षेत्र में डोपामिन बनाने वाली तंत्रिका कोशिकाएं नष्ट होती हैं। डोपामिन शरीर की गति को नियंत्रित करने में भूमिका निभाता है। अप्रैल 2026 में प्रकाशित शोधों, जिनमें यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन का काम भी शामिल था, ने आंतों के सूक्ष्मजीवों की संरचना में बदलाव को रोग के बढ़े जोखिम से जोड़ा। यह संबंध विशेष रूप से जीबीए1 जीन के कुछ रूपों वाले लोगों में देखा गया; ऐसे बदलाव लक्षण दिखने से पहले भी हो सकते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पार्किंसन रोग में सब्स्टैंशिया नाइग्रा की डोपामिन बनाने वाली तंत्रिका कोशिकाएं प्रभावित होती हैं।
  • ब्यूटिरेट, एसीटेट और प्रोपियोनेट लघु-श्रृंखला वसा-अम्लों के उदाहरण हैं।
  • राइबोफ्लेविन विटामिन बी2 और बायोटिन विटामिन बी7 है।
  • डोपामिन, ग्लूटामेट और गामा-अमीनोब्यूटिरिक अम्ल तंत्रिका तंत्र में अलग-अलग संकेतकारी प्रक्रियाओं से जुड़े हैं।

केरलम के रोगियों पर हुए ये अध्ययन पार्किंसन और आंतों के सूक्ष्मजीवों के बीच संबंधों की पड़ताल को आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल इनके निष्कर्षों को संभावित संबंध के रूप में देखना चाहिए, न कि रोग के कारण या उपचार का निर्णायक प्रमाण।

Originally written on October 29, 2026 and last modified on October 29, 2026.

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