ध्रुव स्पेस–सैफ्रान डील से भारत की सैटेलाइट सप्लाई चेन को मजबूती
भारत की स्पेस-टेक कंपनी ध्रुव स्पेस और फ्रांस की एयरोस्पेस फर्म सैफ्रान स्पेस के बीच पेरिस में हुए अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट के दौरान कई अहम समझौते हुए। इन करारों की कुल कीमत 5 मिलियन यूरो से अधिक बताई गई है। यह समझौता सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन यूनिट, ऑप्टिकल पेलोड और ग्राउंड स्टेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़ा है।
एसबीएस-III कार्यक्रम से जुड़ा रणनीतिक करार
यह डील भारत के स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III यानी एसबीएस-III कॉन्स्टेलेशन से जुड़ी है। इस परियोजना के तहत 2027 से 2030 के बीच 52 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की योजना है। इन उपग्रहों का उपयोग सीमा निगरानी और हिंद महासागर क्षेत्र की निगरानी के लिए किया जाएगा।
इस नेटवर्क में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो को 21 उपग्रहों की जिम्मेदारी दी गई है। निजी क्षेत्र के लिए 31 उपग्रह तय किए गए हैं, जिनमें एंटारिस के लिए 15 और पिक्सेल तथा ध्रुव स्पेस के लिए 8-8 उपग्रह शामिल हैं। इससे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी भागीदारी का दायरा और स्पष्ट होता है।
भारतीय और फ्रांसीसी कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग
सैफ्रान स्पेस एयरोस्पेस और रक्षा तकनीकों की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी है, जो उपग्रहों के लिए नेविगेशन और पेलोड सिस्टम जैसी क्षमताएं उपलब्ध कराती है। दूसरी ओर, ध्रुव स्पेस भारत में स्पेस सिस्टम, सैटेलाइट प्लेटफॉर्म और ग्राउंड सेगमेंट समाधानों पर काम करती है।
इस समझौते के जरिए घटकों की आपूर्ति, सिस्टम इंटीग्रेशन और ग्राउंड सपोर्ट जैसे काम एक क्रॉस-बॉर्डर कमर्शियल ढांचे के तहत होंगे। यह केवल खरीद-बिक्री का करार नहीं है, बल्कि भारत की उभरती स्पेस इंडस्ट्री को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने वाला कदम भी है।
समिट में निवेश और वैश्विक साझेदारी का संकेत
यह करार पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट के दौरान हुए 51 रणनीतिक घोषणाओं के व्यापक पैकेज का हिस्सा था। इन घोषणाओं का कुल निवेश मूल्य 20 अरब यूरो बताया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें निजी कंपनियों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- अंतरराष्ट्रीय स्पेस समिट का आयोजन 2026 में पेरिस में हुआ।
- एसबीएस-III का पूरा नाम Space-Based Surveillance Phase-III है।
- इनर्शियल नेविगेशन यूनिट का उपयोग अंतरिक्ष यानों और मिसाइलों में स्थिति तथा गति मापने के लिए किया जाता है।
- इसरो भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जो डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस के तहत काम करती है।
ध्रुव स्पेस और सैफ्रान स्पेस के बीच यह समझौता भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, निजी भागीदारी और रणनीतिक क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।