दिव्यांग पेंशन का दायरा बढ़ेगा, 27 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए ₹53,428 करोड़ का प्रावधान किया गया है और कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना रखा गया है। इसके तहत दिव्यांग पेंशन योजना में बदलाव से लाभार्थियों की संख्या 8.33 लाख से बढ़कर 27 लाख होने की उम्मीद है।
सामाजिक सहायता कार्यक्रम का विस्तार
राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है। इसकी शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी। योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों के वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को सामाजिक सहायता देना है। केंद्र से स्वीकृत राशि अगले पांच वर्षों में कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए है।
योजना को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के माध्यम से लागू किया जाता है। पात्र लाभार्थियों की पहचान और उन्हें सहायता पहुंचाने की जिम्मेदारी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की होती है। सभी 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 3.20 करोड़ लाभार्थियों का अनुमान है। यह संख्या दिव्यांग पेंशन योजना के लिए अनुमानित 27 लाख लाभार्थियों से अलग, पूरे कार्यक्रम की है।
दिव्यांग पेंशन में पात्रता और राशि के बदलाव
संशोधित योजना में पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 18 वर्ष की आयु की शर्त हटा दी गई है। इससे पात्र दिव्यांगजन जन्म से ही सहायता पाने के दायरे में आ सकेंगे। साथ ही, दिव्यांगता का न्यूनतम मानदंड 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किया गया है। यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 में निर्धारित मानदंड के अनुरूप है।
79 वर्ष तक के लाभार्थियों की मासिक पेंशन ₹300 से बढ़ाकर ₹375 की गई है। 80 वर्ष और उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को अब ₹500 के बजाय ₹625 प्रतिमाह मिलेंगे। नई पात्रता शर्तों और पेंशन दरों को योजना के दिशानिर्देश जारी होने के तीन महीने के भीतर लागू किया जाना है।
दिव्यांगजन अधिकार और सामाजिक सुरक्षा का आधार
दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, निर्धारित प्राधिकारी से प्रमाणित किसी निर्दिष्ट दिव्यांगता की कम से कम 40 प्रतिशत स्थिति को मानक दिव्यांगता माना जाता है। अधिनियम में 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताओं को मान्यता दी गई है और समानता, भेदभाव से सुरक्षा तथा सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। संविधान का अनुच्छेद 41 भी राज्य को अपनी आर्थिक क्षमता और विकास की सीमा में वृद्धावस्था, बीमारी और दिव्यांगता जैसी स्थितियों में सार्वजनिक सहायता की व्यवस्था करने का निर्देश देता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त 1995 को हुई थी।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम वर्ष 2016 में लागू किया गया और इसमें 21 निर्दिष्ट दिव्यांगताओं को मान्यता है।
- संविधान का अनुच्छेद 41 राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में शामिल है और सार्वजनिक सहायता से संबंधित है।
- संशोधित दिव्यांग पेंशन दर 79 वर्ष तक ₹375 और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लिए ₹625 प्रतिमाह है।
पात्रता की आयु सीमा और दिव्यांगता प्रतिशत में बदलाव से सहायता अधिक लोगों तक पहुंचने का रास्ता खुलता है। संशोधित पेंशन दरें दिशानिर्देश जारी होने के बाद निर्धारित समयसीमा में लागू होंगी।