तमिलनाडु के कोझिकामुथी में दूसरा ‘महावत गांव’ तैयार: हाथियों के रक्षकों को मिला सम्मान

तमिलनाडु सरकार द्वारा captive (पालित) हाथियों की देखरेख करने वाले महावतों और उनके सहायकों (कवाड़ियों) के लिए कोझिकामुथी, अनामलाई टाइगर रिज़र्व (ATR) में दूसरा समर्पित ‘महावत गांव’ तैयार कर लिया गया है। यह पहल राज्य के वन विभाग द्वारा हाथियों की भलाई को उनके देखभालकर्ताओं के जीवन स्तर से जोड़ते हुए की गई है।

कोझिकामुथी महावत गांव की विशेषताएँ

अनामलाई टाइगर रिज़र्व के उल्लंडी फॉरेस्ट रेंज में स्थित यह गांव 47 महावतों और कवाड़ियों के लिए बनाए गए आवासों से युक्त है। ये सभी कोझिकामुथी मलासर जनजाति समुदाय से हैं, जो 20 से अधिक शिविर हाथियों की देखभाल करते हैं। वरिष्ठ वन अधिकारियों और अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू ने 22 अगस्त को निरीक्षण किया और कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि यह गांव महावतों और कवाड़ियों के जीवन को सुदृढ़ बनाएगा, जिससे हाथियों की देखभाल में भी गुणवत्ता आएगी।
यह क्षेत्र अब न केवल हाथियों की देखभाल के लिए समर्पित है, बल्कि आगंतुकों के लिए एक गैलरी और सौंदर्यीकरण कार्यों के साथ एक शैक्षिक स्थल भी बन गया है।

पहले ‘महावत गांव’ की पृष्ठभूमि: मुदुमलै टाइगर रिज़र्व

तमिलनाडु ने देश का पहला महावत गांव 13 मई को मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा मुदुमलै टाइगर रिज़र्व, थेप्पाकाडू हाथी शिविर में उद्घाटन किया था। यहां 5.6 करोड़ रुपये की लागत से 44 आधुनिक घर बनाए गए थे। यह शिविर एशिया का सबसे पुराना हाथी शिविर है और ब्रिटिश काल से कार्यरत है। वर्तमान में इसमें 27 हाथी हैं, जिनमें 20 कार्यरत कुमकी हाथी हैं जो जंगली हाथियों को गांवों से दूर रखने के लिए प्रशिक्षित हैं।
थेप्पाकाडू शिविर में इरुलर, कुरुंबर और कटुनायक्कर जैसे आदिवासी समुदायों के लोग पीढ़ियों से हाथी-पालन का कार्य कर रहे हैं। पहले वे अत्यंत असुविधाजनक आवासों में रहते थे, लेकिन अब उन्हें जल, शौचालय, बच्चों के खेल के मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं से युक्त घर मिले हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कोझिकामुथी का महावत गांव तमिलनाडु का दूसरा, और भारत का केवल दूसरा ऐसा गांव है।
  • पहला महावत गांव थेप्पाकाडू (मुदुमलै) में मई 2025 में उद्घाटित हुआ।
  • ATR में स्थित कोझिकामुथी गांव 47 महावतों और कवाड़ियों के लिए बनाया गया है।
  • थेप्पाकाडू शिविर एशिया का सबसे पुराना हाथी शिविर है — ब्रिटिश काल में स्थापित।
  • कुमकी हाथी जंगली हाथियों को भगाने और मानव-हाथी संघर्ष को रोकने में उपयोग होते हैं।

तमिलनाडु की यह पहल न केवल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आदिवासी महावत समुदायों को गरिमा और सम्मान प्रदान करने का भी प्रतीक है। यह सामाजिक न्याय, पारंपरिक ज्ञान की मान्यता, और वन-जन जीवन के सहयोग का आदर्श उदाहरण बन चुका है।

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