ट्रंप टैरिफ के प्रभाव से निपटने को भारत की 25,000 करोड़ की ‘निर्यात प्रोत्साहन मिशन’ योजना

भारत सरकार ने आगामी छह वर्षों (2025-2031) के लिए ₹25,000 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका उद्देश्य अमेरिकी टैरिफों के प्रतिकूल प्रभाव से भारतीय निर्यातकों को राहत देना और वैश्विक व्यापार अस्थिरताओं से सुरक्षा प्रदान करना है।

मिशन का स्वरूप: दो योजनाएं, एक लक्ष्य

EPM को दो उप-योजनाओं के माध्यम से लागू किया जाएगा:

  1. निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Protsahan) – ₹10,000 करोड़ से अधिक
  2. निर्यात दिशा (Niryat Disha) – ₹14,500 करोड़ से अधिक

निर्यात प्रोत्साहन (Niryat Protsahan) के प्रमुख तत्व:

  • ब्याज सब्सिडी (Interest Equalisation Support) – ₹5,000 करोड़
  • वैकल्पिक व्यापार वित्तपोषण साधनों का समर्थन
  • ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड
  • नकदी प्रवाह की समस्या को दूर करने के लिए वित्तीय सहायता

निर्यात दिशा (Niryat Disha) में प्रस्तावित योजनाएं:

  • निर्यात गुणवत्ता अनुपालन – ₹4,000 करोड़
  • विदेशी बाजारों का विकास – ₹4,000 करोड़ से अधिक
  • ब्रांडिंग, निर्यात भंडारण, लॉजिस्टिक्स और क्षमता निर्माण
  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक भारतीय एमएसएमई को जोड़ना

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अमेरिका ने 27 अगस्त 2025 से भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लगा दिया है, जो पहले 25% था।
  • इससे कपड़ा, रसायन, चमड़ा और मशीनरी जैसे क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका है।
  • जुलाई 2025 में भारत का निर्यात 7.29% बढ़कर $37.24 अरब पहुंचा, लेकिन व्यापार घाटा $27.35 अरब रहा।
  • अप्रैल-जुलाई 2025-26 में कुल निर्यात $149.2 अरब और आयात $244.01 अरब रहा।

नीति निर्माण और उद्योग संवाद

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 28 अगस्त को अंतर-मंत्रालयी बैठक की, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
  • FIEO (भारतीय निर्यातक संगठन महासंघ) ने सरकार को उद्योग की चुनौतियों से अवगत कराया।
  • सरकार ने स्पष्ट किया कि उद्योग की सिफारिशों को प्राथमिकता दी जा रही है, और जल्द से जल्द EPM को लागू करने की योजना है।

वैश्विक रणनीति और निर्यात विविधीकरण

  • भारत 40 रणनीतिक देशों (जैसे ऑस्ट्रेलिया, जापान, जर्मनी, यूएई) में विशेष अभियान चलाकर निर्यात को बढ़ावा देगा।
  • Export Promotion Councils (EPCs) इस रणनीति की रीढ़ बनेंगी।

निष्कर्ष

50% अमेरिकी टैरिफ से उत्पन्न संकट भारत के लिए नए अवसरों की खोज का संकेत है। ₹25,000 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन के माध्यम से भारत सरकार न केवल अल्पकालिक राहत प्रदान करना चाहती है, बल्कि दीर्घकालीन निर्यात क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी बढ़ाना चाहती है। यह मिशन भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत और स्थायी खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध हो सकता है।

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