जीवन की खोज में पृथ्वी का ‘जीवनरहित’ मॉडल क्यों अहम है
बाह्यग्रहों पर जीवन के संकेत खोजने के लिए वैज्ञानिकों को यह समझना जरूरी है कि जीवन के बिना किसी ग्रह का वातावरण और भू-रासायनिक तंत्र कैसा दिख सकता है। इसी उद्देश्य से वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पृथ्वी का एक आभासी मॉडल तैयार किया है, जो ग्रह के निर्माण से लेकर भविष्य के लगभग 50 करोड़ वर्षों तक के बदलावों का अनुमान लगाता है।
जीवन के बिना पृथ्वी की आधाररेखा
2 नवंबर 2026 को घोषित इस मॉडल का नेतृत्व सामंथा गिल्बर्ट-जानिज़ेक ने किया। इसमें पृथ्वी के भू-रासायनिक तंत्रों का अध्ययन इस तरह किया गया है कि जीवन के प्रभाव को शामिल न किया जाए। मॉडल ने मेंटल से निकलने वाले ऊष्मा प्रवाह सहित ग्रह से जुड़ी 19 विशेषताओं का अनुमान लगाया है। शोध 18 सितंबर 2026 को द प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ था।
यह जीवनरहित आधाररेखा वैज्ञानिकों को यह परखने में मदद कर सकती है कि किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह के वातावरण में दिखने वाली स्थिति जैविक गतिविधि से बनी है या प्राकृतिक, अजैविक प्रक्रियाओं से। मॉडल को अन्य चट्टानी ग्रहों के वातावरण के विकास का अध्ययन करने के लिए भी अनुकूलित किया जा सकता है।
बाह्यग्रहों पर जीवन के संकेतों की जांच
किसी ग्रह के वातावरण में संभावित जैवचिह्न मिलना अपने आप में जीवन का प्रमाण नहीं होता। वैज्ञानिकों को यह भी जांचना पड़ता है कि क्या वही संकेत जीवन के बिना किसी प्रक्रिया से बन सकता है। पृथ्वी का यह अनुकरण ऐसी तुलना के लिए एक संदर्भ देता है और प्रस्तावित हैबिटेबल वर्ल्ड्स ऑब्जर्वेटरी जैसे दूरबीन अभियानों की योजना बनाने में उपयोगी हो सकता है।
इसका महत्व इसलिए भी है कि वातावरण में ऑक्सीजन की मौजूदगी को सीधे जीवन से नहीं जोड़ा जा सकता। कुछ परिस्थितियों में पानी के टूटने जैसी अजैविक प्रक्रियाएं भी ऑक्सीजन जमा कर सकती हैं। इसलिए संकेत की व्याख्या ग्रह के पूरे वातावरण और उसके विकास के संदर्भ में करना जरूरी है।
छोटे चट्टानी ग्रहों पर अलग अध्ययन
2026 में स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के डोअर स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी की मिशेल हिल के नेतृत्व वाली टीम ने छोटे ग्रहों की रहने योग्य क्षमता का अलग मॉडल पेश किया। द प्लैनेटरी साइंस जर्नल में प्रकाशित यह मॉडल ग्रह के आकार और वातावरण की विशेषताओं को ध्यान में रखता है। इसके अनुसार, सूर्य जैसे तारों के रहने योग्य क्षेत्र में स्थित पृथ्वी के कम-से-कम 80 प्रतिशत आकार वाले चट्टानी ग्रह 10 अरब वर्ष या उससे अधिक समय तक अपना वातावरण बनाए रख सकते हैं। यह निष्कर्ष वातावरण के टिके रहने की संभावना बताता है, जीवन की मौजूदगी की पुष्टि नहीं करता।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैवचिह्न ऐसा संकेत है जो संभावित रूप से जीवन से जुड़ा हो सकता है, लेकिन उसकी अजैविक व्याख्याओं की जांच करना भी जरूरी है।
- वातावरण में ऑक्सीजन अकेले जीवन का निर्णायक प्रमाण नहीं है; पानी के टूटने जैसी अजैविक प्रक्रियाएं भी ऑक्सीजन जमा कर सकती हैं।
- भू-रासायनिक बॉक्स मॉडल पृथ्वी के विभिन्न भंडारों को अलग-अलग खंडों की तरह दिखाते हैं और उनके बीच पदार्थ के आने-जाने का अध्ययन सरल बनाते हैं।
- रहने योग्य क्षेत्र वह तारकीय क्षेत्र है जहां उपयुक्त परिस्थितियों में किसी ग्रह की सतह पर तरल पानी संभव हो सकता है।
पृथ्वी का जीवनरहित अनुकरण और छोटे ग्रहों का अध्ययन, दोनों बाह्यग्रहों के वातावरण को समझने के अलग-अलग साधन हैं। इनके निष्कर्ष जीवन की खोज को अधिक सावधान और प्रमाण-आधारित बना सकते हैं।