चेरुवायल रमन: केरल की धान विरासत के संरक्षक

चेरुवायल रमन: केरल की धान विरासत के संरक्षक

केरल के वायनाड जिले के आदिवासी किसान चेरुवायल रमन का 14 अक्टूबर 2026 को 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कुरिचिया समुदाय से आने वाले रमन ने अपने तीन एकड़ खेत में धान की 45 से अधिक पारंपरिक किस्मों को बचाकर रखा। बीजों के संरक्षण और किसानों के बीच उनके प्रसार के कारण उन्हें ‘धान के पिता’ और ‘जीवित धान जीन बैंक’ के नाम से जाना जाता था।

खेत को बनाया धान की विविधता का केंद्र

रमन ने अपने खेत में केरल की स्थानीय धान किस्में उगाईं, जिनमें सुगंधित गंधकाशाला और लाल दाने वाली थोंडी प्रमुख थीं। वे इन किस्मों के बीज दूसरे किसानों को बिना शुल्क देते थे और रासायनिक पदार्थों से मुक्त खेती को बढ़ावा देते थे। उनकी पहल ने पारंपरिक बीजों को केवल संग्रहित करने के बजाय खेती में लगातार इस्तेमाल करते रहने का महत्व दिखाया।

खेती के बीच किसी फसल की किस्म को उसके स्थानीय वातावरण में उगाकर सुरक्षित रखना खेत-आधारित संरक्षण कहलाता है। इसके विपरीत, बीज बैंक में बीजों को नियंत्रित परिस्थितियों में रखा जाता है। स्थानीय परिस्थितियों में लंबे समय से उगाई गई पारंपरिक किस्मों को देशी किस्में भी कहा जाता है। इनमें ऐसी आनुवंशिक विविधता हो सकती है, जो स्थानीय खेती और पर्यावरण के साथ विकसित हुई है।

कृषि और पर्यावरण के लिए योगदान

रमन ने दस वर्ष की आयु से खेती शुरू की थी। वर्ष 2011 में हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता संरक्षण सम्मेलन में उन्होंने केरल के किसान समुदाय का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिभागी शामिल हुए थे। उनका खेत विद्यार्थियों, किसानों और अन्य आगंतुकों के लिए सीखने का स्थान भी था।

कृषि जैव विविधता में भोजन उत्पादन से जुड़ी फसलों, पालतू पशुओं और अन्य जीवों की विविधता शामिल होती है। देशी बीजों को खेतों में उगाने, किसानों के बीच उनका आदान-प्रदान करने और बीज संग्रहों में सुरक्षित रखने से इस विविधता को बचाने में मदद मिलती है। रमन का काम इन तरीकों को एक साथ जोड़ता था।

सम्मान और सार्वजनिक पहचान

देशी पौधों की किस्मों के संरक्षण और पर्यावरण-अनुकूल खेती में योगदान के लिए रमन को 2023 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। इससे पहले, 2016 में उन्हें पौध आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार मिला था। वर्ष 2025 में कृषि क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पहला ओमन चांडी स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पद्म श्री भारत के नागरिक सम्मानों में से एक है और इसकी स्थापना 1954 में हुई थी।
  • राष्ट्रीय पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार पौध आनुवंशिक संसाधनों और उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के प्रयासों को मान्यता देता है।
  • वायनाड केरल का एक जिला है और मनंतवाडी इसकी तालुकों में से एक है।
  • गंधकाशाला और थोंडी केरल से जुड़ी देशी धान किस्में हैं।

चेरुवायल रमन की विरासत उन किसानों और समुदायों के महत्व को रेखांकित करती है, जो पीढ़ियों से स्थानीय बीजों को बचाते और साझा करते आए हैं।

Originally written on October 15, 2026 and last modified on October 15, 2026.

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