ग्रीनलैंड की सुरक्षा संधि से अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को बल
ग्रीनलैंड की संसद इनात्सिसार्ट ने 3 नवंबर 2026 को डेनमार्क और अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते को मंजूरी दे दी। यह समझौता अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और क्षेत्र में रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने का रास्ता खोलता है। हालांकि, इसके लागू होने के लिए डेनमार्क की संसदीय प्रक्रिया पूरी होना अभी बाकी है।
ग्रीनलैंड की संसद में कैसे हुई मंजूरी
नूक में हुए मतदान में समझौते के पक्ष में 16 मत पड़े, विरोध में एक भी मत नहीं आया और सात सदस्य मतदान से अलग रहे। अमेरिकी विदेश विभाग ने 4 नवंबर को इस फैसले का स्वागत किया। विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इसे नाटो और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। ट्रंप के ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने संबंधी बार-बार दिए गए बयानों से पैदा तनाव कम करना भी इसकी पृष्ठभूमि का हिस्सा है।
सैन्य ढांचे और मिसाइल रक्षा पर जोर
समझौते के तहत अमेरिका की सैन्य मौजूदगी मजबूत करने और पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डे का आधुनिकीकरण करने की योजना है। इसके अलावा नार्सार्सुआक और मेस्टर्सविग में अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं। ये कदम ट्रंप की प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली की योजनाओं को आगे बढ़ाने से भी जुड़े हैं। समझौता डेनमार्क की ग्रीनलैंड पर संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार की पुष्टि करता है। इसमें यह भी प्रावधान है कि यदि भविष्य में ग्रीनलैंड स्वतंत्र होता है, तब भी समझौता लागू रह सकता है और ग्रीनलैंड को नाटो में बने रहना होगा। इस तरह सुरक्षा व्यवस्था को ग्रीनलैंड की संभावित संवैधानिक स्थिति से अलग रखकर जारी रखने का प्रावधान किया गया है।
डेनमार्क की मंजूरी और स्थानीय चिंताएं
डेनमार्क की संसद में समझौते पर पहली चर्चा 11 नवंबर और अंतिम मतदान 19 नवंबर 2026 को निर्धारित है। डेनमार्क की संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह लागू होगा। इसलिए ग्रीनलैंड की मंजूरी एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अंतिम स्वीकृति अभी बाकी है। ग्रीनलैंड के कुछ निवासियों और विपक्षी नेताओं ने समझौते से मिलने वाले आर्थिक लाभ तथा अमेरिकी सरकार के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। नालारक पार्टी के नेता पेले ब्रोबर्ग ने भी ऐसी चिंताएं जताई हैं। इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा सहयोग के साथ स्थानीय हितों और राजनीतिक स्वायत्तता को लेकर बहस जारी है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पिटुफिक अंतरिक्ष अड्डे से जुड़ी 1951 की रक्षा व्यवस्था के तहत अमेरिका को अपनी सुविधाओं पर विशेष अधिकार प्राप्त हैं; डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लिए ध्वज तथा संपर्क-संबंधी प्रावधान भी हैं।
- पिटुफिक में बैलिस्टिक मिसाइलों की पूर्व चेतावनी प्रणाली मौजूद है, जिसका उद्देश्य उत्तरी अमेरिका की ओर छोड़ी गई अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों का पता लगाना और उनकी निगरानी करना है।
- प्रस्तावित गोल्डन डोम प्रणाली की अवधारणा में कम कक्षा के अवरोधकों से मिसाइलों को उनके उड़ान के शुरुआती चरण में रोकना शामिल है।
- ग्रीनलैंड की संसद का आधिकारिक नाम इनात्सिसार्ट है और इसकी राजधानी नूक है।
ग्रीनलैंड की मंजूरी से आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका-डेनमार्क सुरक्षा सहयोग को नई गति मिली है, लेकिन समझौते का भविष्य डेनमार्क के अंतिम संसदीय निर्णय और ग्रीनलैंड में जारी सार्वजनिक बहस पर निर्भर करेगा।