गुजरात के साणंद में देश की पहली एंड-टू-एंड सेमीकंडक्टर OSAT पायलट लाइन का शुभारंभ

भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने साणंद (गुजरात) में CG पावर की ओर से स्थापित भारत की पहली एंड-टू-एंड OSAT पायलट लाइन सुविधा का उद्घाटन किया। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूत आधार प्रदान करने वाली मानी जा रही है।

क्या है OSAT पायलट लाइन और इसका महत्व?

OSAT का पूर्ण रूप है Outsourced Semiconductor Assembly and Test। यह सुविधा चिप्स की असेंबली, पैकेजिंग, परीक्षण और पोस्ट-टेस्ट सेवाओं की संपूर्ण प्रक्रिया को शामिल करती है। इस पायलट लाइन में बने चिप्स का उपयोग ग्राहक स्वीकृति (customer qualification) के लिए किया जाएगा, जो व्यावसायिक उत्पादन की दिशा में पहला निर्णायक कदम है।
यह केंद्र भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत स्थापित 10 प्रमुख प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, निर्माण और परीक्षण में वैश्विक शक्ति बनाना है।

CG सेमी की विशेषताएं और योजनाएं

  • CG Semi साणंद में दो अत्याधुनिक संयंत्र (G1 और G2) स्थापित कर रही है।
  • G1 सुविधा की अधिकतम उत्पादन क्षमता प्रतिदिन लगभग 0.5 मिलियन यूनिट है।
  • यह इकाई लेवल-1 ऑटोमेशन के लिए MES सिस्टम, उच्च गुणवत्ता वाले उपकरण और इन-हाउस विश्वसनीयता प्रयोगशालाओं से सुसज्जित है।
  • कंपनी ₹7,600 करोड़ का निवेश कर रही है और 2026 तक व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने की योजना है।
  • G2 संयंत्र की निर्माणाधीन स्थिति है, जिसकी क्षमता 14.5 मिलियन यूनिट प्रतिदिन होगी।
  • दोनों संयंत्रों के माध्यम से 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) चिप निर्माण की अंतिम प्रक्रिया का हिस्सा है।
  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन ने अब तक 10 परियोजनाओं को मंज़ूरी दी है।
  • 2025 में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन टूल्स का उपयोग 1.2 करोड़ बार किया गया।
  • 17 संस्थानों द्वारा डिज़ाइन किए गए 20 चिप्स पहले ही मोहाली स्थित SCL लैब में निर्मित किए जा चुके हैं।

भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में कदम

श्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर टैलेंट गैप को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 2032 तक दुनिया में 10 लाख सेमीकंडक्टर पेशेवरों की कमी आंकी गई है। भारत सरकार ने 270 विश्वविद्यालयों के साथ साझेदारी कर छात्रों को उच्च स्तरीय डिज़ाइन टूल्स तक पहुँच दी है।
CG Semi ने भी इस दिशा में कदम उठाते हुए भारतीय इंजीनियरों और तकनीशियनों को मलेशिया में प्रशिक्षण दिलवाया है, जिससे उत्पादन प्रारंभ होते ही कुशल कार्यबल उपलब्ध रहेगा।
CG Semi की यह पहल न केवल तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।

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