कोयला खदानों के पुनर्विकास में SUVIKALP को SKOCH गोल्ड सम्मान

कोयला खदानों के पुनर्विकास में SUVIKALP को SKOCH गोल्ड सम्मान

कोयला मंत्रालय के अधीन कोयला नियंत्रक संगठन (सीसीओ) को अपनी SUVIKALP पहल के लिए 26 सितंबर 2026 को SKOCH गोल्ड पुरस्कार मिला। यह सम्मान ‘डिजिटल परिचालन दक्षता—आंकड़ा-आधारित निर्णय’ श्रेणी में दिया गया। SUVIKALP एक आंतरिक डिजिटल उपकरण है, जो खनन बंद होने के बाद खदानों और उनसे जुड़ी भूमि के टिकाऊ उपयोग की योजना बनाने में मदद करता है।

खनन के बाद भूमि के उपयोग की योजना

खदान का संचालन समाप्त होने के बाद भूमि को किस काम में लाया जाए, इसे खदान पुनर्विकास कहा जाता है। इस प्रक्रिया में केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि पर्यावरण की बहाली, स्थानीय समुदायों की परिस्थितियां और तकनीकी व्यवहार्यता भी महत्वपूर्ण होती हैं। SUVIKALP संभावित परियोजनाओं का इन पहलुओं के आधार पर आकलन और क्रम-निर्धारण करता है। इससे अलग-अलग विकल्पों की तुलना एक समान कसौटियों पर की जा सकती है।

इस पहल का उद्देश्य खदान बंद करने की प्रक्रिया को टिकाऊ बनाना और खनन से खाली हुई भूमि पर नए आर्थिक अवसर विकसित करना है। साथ ही, यह पर्यावरणीय सुधार और स्थानीय समुदायों के कल्याण को भूमि-उपयोग संबंधी फैसलों से जोड़ती है। इस तरह खदान बंद होने के बाद की योजना को केवल तकनीकी प्रक्रिया न मानकर सामाजिक और पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में सहायता मिलती है।

PRISM से परियोजना विकल्पों को मिलता है आधार

SUVIKALP में PRISM नामक मॉडल शामिल है। इसका पूरा नाम ‘पोस्ट-माइनिंग रिपर्पज़िंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजी मॉडल’ है। यह खदानों के पुनर्विकास के लिए परियोजना संबंधी विचार, उदाहरण और उन्हें लागू करने के तरीके उपलब्ध कराता है। संबंधित पक्ष इन जानकारियों के सहारे संभावित परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर विचार कर सकते हैं।

इस उपकरण की खासियत यह है कि परियोजनाओं को केवल आमदनी के आधार पर नहीं परखा जाता। तकनीकी, पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक—चारों कसौटियों को साथ रखकर उनका मूल्यांकन किया जाता है। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होती है और भूमि के भावी उपयोग में स्थानीय परिस्थितियों तथा पर्यावरणीय उद्देश्यों को शामिल करने का अवसर मिलता है।

पुरस्कार और ज्ञान-साझाकरण पहल

SKOCH पुरस्कार ने SUVIKALP को डिजिटल माध्यम से बेहतर परिचालन और आंकड़ा-आधारित निर्णय लेने के प्रयास के रूप में मान्यता दी। इस सम्मान के लिए कोयला नियंत्रक संगठन के निरुत्पल सिंह और रणविजय कुमार सिंह को भी SUVIKALP: माइन रिपर्पज़िंग टूल के संदर्भ में सम्मानित किया गया। संगठन ने इस विषय पर SUVIKALP संवाद वेबिनार शृंखला भी आयोजित की, जिसमें 12 विषयगत वेबिनार हुए। इनका उद्देश्य खदान पुनर्विकास से जुड़ी जानकारी साझा करना और संबंधित पक्षों के निर्णयों को सूचित बनाना था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कोयला नियंत्रक संगठन, कोयला मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • SUVIKALP खदान पुनर्विकास के लिए सीसीओ का विकसित आंतरिक उपकरण है।
  • PRISM का पूरा नाम ‘पोस्ट-माइनिंग रिपर्पज़िंग इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रैटेजी मॉडल’ है।
  • SUVIKALP संवाद शृंखला में 12 विषयगत वेबिनार आयोजित किए गए।

खदानों के बंद होने के बाद भूमि का उपयोग कैसे हो, इस पर बहु-पक्षीय और आंकड़ा-आधारित सोच को बढ़ावा देना SUVIKALP की प्रमुख भूमिका है। यह पहल खनन क्षेत्र में टिकाऊ भूमि-प्रबंधन और समुदाय-केंद्रित पुनर्विकास की दिशा में उपयोगी आधार प्रदान करती है।

Originally written on October 21, 2026 and last modified on October 21, 2026.

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