इंडिया बिएनाले 2026 में जंतर-मंतर बनेगा कला और विरासत का नया मंच
दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर इंडिया बिएनाले 2026 के प्रमुख आयोजन स्थलों में शामिल किया गया है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित यह 108 दिवसीय उत्सव कला, वास्तुकला और डिजाइन पर केंद्रित होगा। इसका आयोजन 4 दिसंबर 2026 से 21 मार्च 2027 तक प्रस्तावित है और इसमें 20 से अधिक देशों के प्रतिभागी शामिल होंगे। जंतर-मंतर को इस आयोजन से जोड़ने पर दिल्ली की खगोलीय विरासत और समकालीन सांस्कृतिक गतिविधियां एक ही मंच पर आएंगी।
खगोलीय गणनाओं के लिए बना था जंतर-मंतर
दिल्ली का जंतर-मंतर महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा 18वीं शताब्दी के आरंभ में बनवाई गई पांच वेधशालाओं में से एक है। इसका निर्माण 1724 में हुआ था। यहां के विशाल पत्थर और ईंट से बने यंत्रों का उपयोग खगोलीय पिंडों के निरीक्षण, समय मापन और उनकी स्थिति की गणना के लिए किया जाता था।
सम्राट यंत्र एक विशाल धूपघड़ी है, जिससे स्थानीय समय मापा जा सकता है। राम यंत्र का उपयोग खगोलीय पिंडों की ऊंचाई और दिशा जानने में होता है। जयप्रकाश यंत्र की परस्पर पूरक अवतल संरचनाएं आकाशीय निर्देशांकों को समझने में मदद करती हैं। ये उपकरण उस दौर में गणित और खगोल विज्ञान के व्यावहारिक उपयोग के उल्लेखनीय उदाहरण हैं।
दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों में फैलेगा आयोजन
बिएनाले का मुख्य केंद्र 16वीं शताब्दी का पुराना किला होगा, जहां संस्कृति मंत्रालय की प्रदर्शनी आयोजित होने की संभावना है। लाल किला, कुतुब मीनार परिसर, लोधी गार्डन, अग्रसेन की बावली और सफदरजंग मकबरा भी आयोजन स्थलों में शामिल हैं। कार्यक्रम में वास्तुकला और डिजाइन से जुड़ी संस्थाओं के साथ सार्वजनिक तथा निजी कला संस्थान और सांस्कृतिक संगठन भाग लेंगे।
प्रतिभागियों में राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय, किरण नादर कला संग्रहालय, नीता मुकेश अंबानी सांस्कृतिक केंद्र, जेएसडब्ल्यू फाउंडेशन और डीएजी शामिल हैं। अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर आयोजन होने से बिएनाले का दायरा किसी एक प्रदर्शनी स्थल तक सीमित नहीं रहेगा।
सार्वजनिक स्थल और विरासत का नया संदर्भ
जंतर-मंतर लंबे समय से सार्वजनिक जीवन और नागरिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। 11 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर रोड के एक हिस्से को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के दर्जे से हटाया गया। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी मैदान की पहचान की गई। अब बिएनाले के आयोजन स्थलों में जंतर-मंतर का शामिल होना इसके खगोलीय और स्थापत्य महत्व को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संदर्भ में भी सामने लाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में वेधशालाएं बनवाई थीं।
- सम्राट यंत्र का उपयोग स्थानीय समय मापने के लिए किया जाता है।
- जयपुर का जंतर-मंतर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में 2010 में शामिल हुआ था; यह दिल्ली के जंतर-मंतर से अलग स्थल है।
- पुराना किला दिल्ली का 16वीं शताब्दी का किला है और इंडिया बिएनाले 2026 का मुख्य केंद्र निर्धारित किया गया है।
इंडिया बिएनाले 2026 में जंतर-मंतर की भागीदारी दिल्ली की वैज्ञानिक विरासत को कला और स्थापत्य संवाद से जोड़ेगी। यह आयोजन राजधानी के कई ऐतिहासिक स्थलों को एक साझा सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करेगा।