आईआईटी रोपड़ से सेना के 59 अधिकारियों को रक्षा तकनीक की पहली एमटेक उपाधि

आईआईटी रोपड़ से सेना के 59 अधिकारियों को रक्षा तकनीक की पहली एमटेक उपाधि

भारतीय सेना और उच्च तकनीकी शिक्षा के बीच सहयोग की दिशा में 9 अक्टूबर 2026 को एक अहम उपलब्धि दर्ज हुई। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रोपड़ ने बख्तरबंद कोर केंद्र एवं विद्यालय (एसीसीऐंडएस) के 59 अधिकारियों को रक्षा प्रौद्योगिकी में पहली एमटेक उपाधियां प्रदान कीं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से सैन्य उपयोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

सेना की जरूरतों से जुड़ा विशेष पाठ्यक्रम

आईआईटी रोपड़ और एसीसीऐंडएस ने मिलकर इस स्नातकोत्तर कार्यक्रम को विकसित किया है। उपाधि समारोह महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित एसीसीऐंडएस में आयोजित हुआ, जहां आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रोफेसर राजीव आहूजा ने अधिकारियों को उपाधियां दीं। यह किसी आईआईटी में सैन्य उपयोगों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया पहला कार्यक्रम है।

पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध और रक्षा क्षेत्र की समस्याओं के समाधान पर जोर है। इसका उद्देश्य अकादमिक ज्ञान को सेना की तकनीकी जरूरतों से जोड़ना है, ताकि अधिकारी रक्षा प्रणालियों के विकास और आधुनिकीकरण में योगदान दे सकें।

बख्तरबंद वाहनों और आयुध पर शोध

कार्यक्रम के तहत संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के प्रमुख क्षेत्रों में बख्तरबंद वाहन तकनीक, उन्नत आयुध और नई सामग्री शामिल हैं। भारतीय सेना की बख्तरबंद कोर टैंकों सहित बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों से जुड़ी सैन्य शाखा है। एसीसीऐंडएस इस कोर से संबंधित विशेष प्रशिक्षण प्रदान करता है।

इस साझेदारी से तकनीकी शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण के बीच समन्वय मजबूत हो सकता है। रक्षा उपकरणों के डिजाइन, उपयोग और सुधार से जुड़ी चुनौतियों पर काम करने के लिए अधिकारियों को शोध-आधारित दृष्टिकोण मिलता है। समारोह में कैप्टन अभिषेक कुमार को टैंक प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम-54 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कमांडेंट एसीसीऐंडएस रोलिंग ट्रॉफी और कमांडेंट स्वर्ण पदक भी दिया गया।

स्वदेशी रक्षा क्षमता को बढ़ावा

कार्यक्रम के घोषित उद्देश्यों में सशस्त्र बलों का तकनीकी आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण शामिल है। स्वदेशीकरण का अर्थ रक्षा उपकरणों और तकनीकों का देश में विकास या उत्पादन करना है। रक्षा विनिर्माण से जुड़ी विशेषज्ञता बढ़ाना भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विकसित भारत 2047 की परिकल्पना से भी जुड़ता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआईटी रोपड़ और बख्तरबंद कोर केंद्र एवं विद्यालय ने रक्षा प्रौद्योगिकी का यह एमटेक कार्यक्रम संयुक्त रूप से विकसित किया है।
  • पहले उपाधि प्राप्त करने वाले समूह में एसीसीऐंडएस के 59 अधिकारी शामिल थे।
  • आईआईटी राष्ट्रीय महत्व के संस्थान हैं और इनकी स्थापना का कानूनी आधार प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम, 1961 है।
  • अहिल्यानगर महाराष्ट्र में स्थित है; बख्तरबंद कोर का संबंध टैंकों और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहनों से है।

यह पहल उच्च शिक्षा संस्थानों और सेना के बीच व्यावहारिक साझेदारी का उदाहरण है। रक्षा तकनीक में प्रशिक्षित अधिकारी स्वदेशी अनुसंधान और सैन्य आधुनिकीकरण की जरूरतों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

Originally written on October 10, 2026 and last modified on October 10, 2026.

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