आईआईटी कानपुर का बांस-आधारित अवरोध रोकेगा जमीन के कंपन

आईआईटी कानपुर का बांस-आधारित अवरोध रोकेगा जमीन के कंपन

वाहनों, निर्माण कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों से पैदा होने वाले कंपन जमीन के रास्ते आसपास की इमारतों तक पहुंच सकते हैं। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने ऐसे कंपन का प्रसार कम करने के लिए भूमिगत खाइयों में बांस भरकर बनाए जाने वाले अवरोध विकसित किए हैं। यह तकनीक निष्क्रिय तरीके से कंपन को रोकने या कमजोर करने के लिए तैयार की गई है।

भूमिगत खाइयों में बांस का उपयोग

इस व्यवस्था का नाम “बांस-भरे तरंग अवरोधों वाली निष्क्रिय कंपन-छनन व्यवस्था” है। इसे आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की प्रियंका घोष और श्रेयशराव सुराप्रेड्डी ने विकसित किया। इसमें जमीन के भीतर खाइयां बनाकर बांस भरा जाता है। ये अवरोध कंपन के आगे बढ़ने के रास्ते में रुकावट पैदा करते हैं, ताकि संवेदनशील इमारतों और ढांचों तक कंपन की तीव्रता कम पहुंचे।

उपलब्ध पेटेंट विवरण के अनुसार, इस तकनीक का पेटेंट नंबर 436990 है और इसे 3 जुलाई 2023 को प्रदान किया गया था। पेटेंट में आविष्कारकों के रूप में एस. सुराप्रेड्डी और पी. घोष का नाम दर्ज है।

कम लागत और आसान स्थापना पर जोर

शोधकर्ताओं के अनुसार, बांस आधारित व्यवस्था को पर्यावरण-अनुकूल और किफायती विकल्प के रूप में तैयार किया गया है। इसे स्थापित करने, हटाने और दोबारा लगाने में आसानी इसका एक प्रमुख लाभ है। डिजाइन का उद्देश्य खाई की दीवारों से मिट्टी खिसकने की समस्या घटाना, रेत के खाली हिस्सों को रोकना और खाई के ढहने की आशंका कम करना भी है।

आईआईटी कानपुर ने इस तकनीक को लाइसेंस के लिए उपलब्ध कराया है। हालांकि, इसका उपयोग हर स्थान पर समान परिणाम देगा, यह जरूरी नहीं है। जमीन की प्रकृति और कंपन की विशेषताओं के आधार पर इसकी उपयुक्तता का आकलन करना होगा। इसलिए निर्माण स्थल या औद्योगिक क्षेत्र में इस्तेमाल से पहले स्थानीय भू-स्थितियों का अध्ययन अहम रहेगा।

शोध में ऊंची आवृत्ति पर बेहतर प्रदर्शन

इस तकनीक से संबंधित अध्ययन अक्टूबर 2024 में जर्नल ऑफ जियोटेक्निकल एंड जियोएनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में प्रकाशित हुआ। मार्च 2025 में आईएसईटी जर्नल ऑफ अर्थक्वेक टेक्नोलॉजी में प्रकाशित शोध ने भी इसके प्रदर्शन को संतोषजनक बताया, विशेषकर ऊंची आवृत्ति वाले कंपन के मामले में। ये निष्कर्ष बताते हैं कि भूमिगत अवरोधों का प्रभाव कंपन की आवृत्ति के अनुसार बदल सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कंपन यांत्रिक तरंगों के रूप में जमीन और अन्य माध्यमों से आगे बढ़ते हैं।
  • निष्क्रिय कंपन नियंत्रण में सामग्री और यांत्रिक संरचना के जरिए तरंगों को कमजोर किया जाता है।
  • सक्रिय कंपन नियंत्रण में संवेदक और प्रेरक आने वाले कंपन को काटने के लिए विपरीत प्रभाव उत्पन्न करते हैं।
  • आईआईटी कानपुर उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर में स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है।

बांस से बने ये अवरोध शहरी निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन से फैलने वाले कंपन को नियंत्रित करने का एक वैकल्पिक उपाय प्रस्तुत करते हैं। उनका वास्तविक लाभ स्थल की मिट्टी और कंपन की प्रकृति के अनुरूप उपयोग पर निर्भर करेगा।

Originally written on November 2, 2026 and last modified on November 2, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *