अशोक सेन को ओस्कार क्लाइन पदक, सैद्धांतिक भौतिकी में भारत का गौरव
प्रख्यात भौतिक विज्ञानी अशोक सेन को 22 अक्टूबर 2026 को वर्ष 2026 का ओस्कार क्लाइन पदक प्रदान किया गया। वह यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी हैं। स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल भौतिकी समिति यह पदक हर वर्ष देती है।
सैद्धांतिक भौतिकी में सम्मान का महत्व
ओस्कार क्लाइन पदक का नाम स्वीडन के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ओस्कार क्लाइन के नाम पर रखा गया है। सेन को स्ट्रिंग सिद्धांत में उनके योगदान के लिए यह सम्मान मिला। इस क्षेत्र में उनका शोध चार दशक से अधिक समय से जारी है। पदक प्राप्त करने के दिन उन्होंने स्टॉकहोम विश्वविद्यालय के अल्बानोवा केंद्र में 2026 का ओस्कार क्लाइन स्मृति व्याख्यान भी दिया। व्याख्यान का विषय था—“स्ट्रिंग्स से गुरुत्वाकर्षण और गुरुत्वाकर्षण से स्ट्रिंग्स”।
स्ट्रिंग सिद्धांत में सेन का योगदान
स्ट्रिंग सिद्धांत भौतिकी का एक सैद्धांतिक ढाँचा है, जिसमें प्रकृति के मूल घटकों को बिंदु के बजाय एक-आयामी सूक्ष्म डोरियों के रूप में समझा जाता है। इन डोरियों के अलग-अलग कंपन अलग-अलग कणों के रूप में दिखाई देते हैं। सेन के कार्य ने इस सिद्धांत के कई अहम पहलुओं को समझने में मदद की है।
उनके प्रमुख योगदानों में एस-द्वैत, कृष्ण विवर की एंट्रॉपी और स्ट्रिंग क्षेत्र सिद्धांत पर शोध शामिल हैं। एस-द्वैत का विचार किसी सिद्धांत के प्रबल युग्मन वाले वर्णन को दुर्बल युग्मन वाले वर्णन से जोड़ता है। कृष्ण विवर की एंट्रॉपी के अध्ययन में उससे जुड़े सूक्ष्म अवस्थाओं की गिनती की जाती है। वहीं, स्ट्रिंग क्षेत्र सिद्धांत में क्षेत्रों के माध्यम से स्ट्रिंग की गति और परस्पर अंतःक्रियाओं का वर्णन किया जाता है।
सेन बेंगलुरु स्थित अंतरराष्ट्रीय सैद्धांतिक विज्ञान केंद्र में आईसीटीएस-इन्फोसिस माधव चेयर प्रोफेसर हैं। उन्हें 2012 में मौलिक भौतिकी का ब्रेकथ्रू पुरस्कार और 2014 में डिरैक पदक मिला था। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने 24 अक्टूबर 2026 को उन्हें बधाई दी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ओस्कार क्लाइन स्वीडन के सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी थे; उनके नाम पर ओस्कार क्लाइन पदक दिया जाता है।
- रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज का मुख्यालय स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में है।
- बेकनस्टीन–हॉकिंग सूत्र कृष्ण विवर की एंट्रॉपी को उसके घटना क्षितिज के क्षेत्रफल से जोड़ता है।
- डिरैक पदक का नाम सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी पॉल डिरैक के नाम पर रखा गया है।
ओस्कार क्लाइन पदक से सेन के लंबे शोध-कार्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। यह सम्मान सैद्धांतिक भौतिकी में भारत की उपस्थिति को भी रेखांकित करता है।