अरुणाचल में ‘अचूक प्रहार’ सैन्य अभ्यास: भारत-चीन सीमा पर सामरिक समन्वय का प्रदर्शन

भारतीय सेना की स्पीयर कॉर्प्स और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के मध्य क्षेत्र में चार दिवसीय युद्धाभ्यास ‘अचूक प्रहार’ सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभ्यास 25 से 28 अगस्त, 2025 तक चला और इसका उद्देश्य उच्च ऊंचाई पर संयुक्त संचालन की तैयारी और तालमेल का परीक्षण करना था।

अभ्यास ‘अचूक प्रहार’ की विशेषताएँ

इस युद्धाभ्यास के दौरान मोर्टार, मशीनगन, रॉकेट और ग्रेनेड जैसे हथियारों का प्रयोग कर सैनिकों की युद्धक क्षमता और तालमेल की जांच की गई। अभ्यास में सेनाओं की संक्रियात्मक और सामरिक सामंजस्यता देखने को मिली, जिससे यह सिद्ध हुआ कि भारतीय सेना और ITBP सीमावर्ती क्षेत्रों में एकीकृत रूप से कार्य करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
स्पीयर कॉर्प्स के अधीन स्पीयरहेड डिवीजन द्वारा यह अभ्यास ITBP के साथ मिलकर किया गया, जिससे यह दर्शाया गया कि दोनों बल उच्च हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP): एक परिचय

ITBP एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जिसकी स्थापना 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी। इसका मुख्य कार्य भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करना है, जो 3,488 किमी लंबी है और लद्दाख के काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक फैली हुई है।
यह बल विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित है, जिसके अधिकांश जवान और अधिकारी कुशल पर्वतारोही और स्कीयर होते हैं। ITBP को 2004 में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत पूर्ण सशस्त्र बल घोषित किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसका ध्येय वाक्य है — “शौर्य- दृढ़ता- कर्मनिष्ठा”

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अभ्यास ‘अचूक प्रहार’ 25-28 अगस्त, 2025 को अरुणाचल प्रदेश में आयोजित हुआ।
  • इसमें भारतीय सेना की स्पीयरहेड डिवीजन और ITBP ने भाग लिया।
  • ITBP की स्थापना 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद की गई थी।
  • ITBP 3,488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा की सुरक्षा करती है।
  • ITBP केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।

यह संयुक्त अभ्यास भारत की सामरिक तैयारी का सशक्त उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि हमारी सेनाएं देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार हैं। पर्वतीय और सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की समन्वित सैन्य गतिविधियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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