‘The Medicolegal Guidebook’ का लोकार्पण: चिकित्सा और विधि के बीच सेतु बनाने की पहल

‘The Medicolegal Guidebook’ का लोकार्पण: चिकित्सा और विधि के बीच सेतु बनाने की पहल

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अरुण राम मेघवाल ने नई दिल्ली में ‘The Medicolegal Guidebook’ का औपचारिक विमोचन किया। यह प्रकाशन भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में चिकित्सा और कानूनी ज़िम्मेदारियों के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

इस गाइडबुक का उद्देश्य चिकित्सा पेशेवरों को रोगी सुरक्षा, नैतिक आचरण और जवाबदेही जैसे जटिल मुद्दों में व्यावहारिक और कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करना है।

चिकित्सा और कानून के बीच की खाई को पाटने की दिशा में

लोकार्पण समारोह में मंत्री मेघवाल ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विधिक विवादों और नियामकीय जटिलताओं में वृद्धि हो रही है, जिससे मेडिको-लीगल जागरूकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक हो गई है।

यह गाइडबुक डॉक्टरों, अस्पताल प्रशासकों और स्वास्थ्य संस्थानों को उनके कानूनी दायित्वों, अनुमति (consent), दस्तावेज़ीकरण, लापरवाही के मानकों और रोगी अधिकारों को समझाने में सहायता करेगी।

लेखन में विशेषज्ञों की सहभागिता

इस पुस्तक को एक बहु-अनुशासनात्मक टीम ने लिखा है, जिसमें चिकित्सा और विधिक दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं:

  • दीपक सिंगला – मेडिकल डायरेक्टर, महाराजा अग्रसेन अस्पताल
  • आरुषि सिंगला – पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, ESIC मेडिकल कॉलेज
  • राकेश मल्होत्रा – वरिष्ठ अधिवक्ता
  • कुशल मल्होत्रा – अधिवक्ता

लेखकों के अनुसार, यह गाइडबुक चिकित्सकों को क्लिनिकल निर्णयों को कानूनी और नैतिक दायरे में लेने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।

रोगी सुरक्षा और नैतिक चिकित्सा पर विशेष ध्यान

पुस्तक में जोर दिया गया है कि चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में:

  • सूचित सहमति (Informed Consent)
  • सही रिकॉर्ड रखना
  • नैतिक उत्तरदायित्व निभाना
  • विधिक प्रावधानों का पालन

— ये सभी तत्व न केवल कानूनी जोखिम को कम करते हैं, बल्कि रोगी देखभाल की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाते हैं। यह पुस्तक डॉक्टरों, अस्पताल प्रबंधकों और विधिक पेशेवरों के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में काम करेगी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • मेडिको-लीगल मामले चिकित्सा कार्यप्रणाली और कानून के प्रतिच्छेदन से उत्पन्न होते हैं।
  • रोगी की सहमति और दस्तावेज़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं में प्रमुख विधिक सुरक्षा उपकरण हैं।
  • मेडिकल नेग्लिजेंस का मूल्यांकन मान्यता प्राप्त सावधानी के स्तर के अनुसार किया जाता है।
  • भारत में स्वास्थ्य सेवा सिविल और क्रिमिनल दोनों विधिक प्रावधानों के अधीन है।

विधिक और चिकित्सकीय गणमान्यजनों की उपस्थिति

इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस हेमा कोहली, उच्च न्यायालय की न्यायाधीश जस्टिस मधु जैन और अन्य वरिष्ठ चिकित्सकीय एवं विधिक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

यह आयोजन इस बात का प्रतीक था कि चिकित्सा और विधिक समुदायों के बीच संवाद आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और रोगी अधिकारों की रक्षा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

‘The Medicolegal Guidebook’ स्वास्थ्य सेवा के बदलते परिदृश्य में कानूनी साक्षरता और नैतिक चिकित्सा के लिए एक आवश्यक संसाधन के रूप में उभर रही है।

Originally written on February 9, 2026 and last modified on February 9, 2026.

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