RELIEF योजना: पश्चिम एशिया संकट में निर्यातकों को सहारा
भारत सरकार ने हाल ही में RELIEF (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में समुद्री व्यवधानों से प्रभावित निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है। क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम और जोखिम में वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस योजना के माध्यम से सरकार ने निर्यातकों को राहत देने और व्यापार निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया है।
योजना का उद्देश्य और दायरा
RELIEF योजना का मुख्य उद्देश्य उन निर्यातकों को समयबद्ध और लक्षित सहायता प्रदान करना है, जो असामान्य लॉजिस्टिक और वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यह योजना Export Promotion Mission (EPM) के अंतर्गत संचालित होती है और विशेष रूप से पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों में आई बाधाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसमें यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, इजरायल, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान और यमन जैसे देशों को शामिल किया गया है।
प्रमुख विशेषताएं और वित्तीय सहायता
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता जोखिम कवरेज में वृद्धि है। जिन निर्यातकों ने 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच ECGC बीमा के तहत निर्यात किया है, उन्हें संघर्ष से जुड़े नुकसान पर 100% तक जोखिम कवरेज मिलेगा। वहीं, 16 मार्च से 15 जून 2026 के बीच होने वाले निर्यातों के लिए 95% तक जोखिम कवरेज प्रदान किया जाएगा। यह प्रावधान निर्यातकों के विश्वास को बनाए रखने और व्यापार को जारी रखने में सहायक होगा।
एमएसएमई के लिए विशेष प्रावधान
RELIEF योजना में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए विशेष राहत दी गई है। जिन MSME निर्यातकों के पास बीमा नहीं है, वे अतिरिक्त माल ढुलाई और बीमा लागत का 50% तक प्रतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसके अलावा, बंदरगाहों पर भंडारण शुल्क में छूट और अटके हुए माल के लिए प्रक्रियात्मक राहत भी प्रदान की जा रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- RELIEF योजना Export Promotion Mission (EPM) के तहत शुरू की गई है।
- ECGC के तहत पुराने निर्यातों के लिए 100% तक जोखिम कवरेज प्रदान किया जाता है।
- MSME निर्यातकों को अतिरिक्त लागत पर 50 लाख रुपये तक की सहायता मिल सकती है।
- यह योजना पश्चिम एशिया के समुद्री व्यापार मार्गों में व्यवधान से निपटने के लिए बनाई गई है।
कार्यान्वयन और निगरानी व्यवस्था
इस योजना को ECGC लिमिटेड द्वारा लागू किया जाएगा, जो दावों के निपटान और सहायता वितरण की जिम्मेदारी संभालेगा। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक रियल-टाइम डैशबोर्ड विकसित किया गया है, जिससे फंड के उपयोग और दावों की निगरानी की जा सके। इसके साथ ही EPM संचालन समिति द्वारा नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि योजना बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी बनी रहे।
यह योजना भारत के निर्यात क्षेत्र को वैश्विक चुनौतियों के बीच स्थिरता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो व्यापारिक गतिविधियों को बनाए रखने और आर्थिक विकास को समर्थन देने में सहायक साबित होगी।