PSLV-C62 मिशन से लॉन्च होगा ‘अन्वेषा’ सैटेलाइट: भारत की रणनीतिक अंतरिक्ष क्षमताओं में नई छलांग
भारत जल्द ही अपनी अंतरिक्ष-आधारित निगरानी और भू-मानचित्रण क्षमता को और सशक्त बनाने जा रहा है। अन्वेषा (Anvesha) नामक नवीन अर्थ-ऑब्ज़र्वेशन सैटेलाइट को PSLV-C62 मिशन के तहत लॉन्च किया जाएगा। यह उपग्रह न केवल रणनीतिक बल्कि नागरिक उपयोगों के लिए भी विकसित किया गया है, और यह इस बात का संकेत है कि भारत अब उच्च-सटीकता वाले स्पेक्ट्रल डेटा पर केंद्रित हो रहा है — जो रक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक है।
PSLV-C62 मिशन और रणनीतिक संदर्भ
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) श्रीहरिकोटा से PSLV-C62 मिशन के तहत अन्वेषा को प्रक्षेपित करने की तैयारी में है। यह मिशन 2025 में हुई तकनीकी गड़बड़ी के बाद PSLV रॉकेट की वापसी का प्रतीक भी है। इस मिशन के साथ कुल 15 सह-यात्री उपग्रह भी प्रक्षेपित किए जाएंगे, जो यह दर्शाता है कि भारत अब रणनीतिक और वाणिज्यिक दोनों रूपों में लॉन्च सेवा प्रदाता के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
क्या है अन्वेषा की विशेषता?
अन्वेषा, जिसे EOS-N1 के नाम से भी जाना जाता है, को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट द्वारा विकसित किया गया है। इसका वजन लगभग 100 से 150 किलोग्राम है और यह 600 किमी ऊंचाई पर निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में कार्य करेगा।
इसकी प्रमुख तकनीकी विशेषता है हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड, जो इसे पारंपरिक उपग्रहों से अलग बनाता है। जबकि सामान्य उपग्रह तीन व्यापक रंग बैंड कैप्चर करते हैं, हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर सैकड़ों संकीर्ण स्पेक्ट्रल बैंड रिकॉर्ड करते हैं। इससे सामग्री की पहचान, मिट्टी की संरचना, वनस्पति स्वास्थ्य और छिपी हुई संरचनाओं का उच्च सटीकता से विश्लेषण संभव होता है।
हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग और परिचालन लाभ
पृथ्वी की प्रत्येक सतह एक विशिष्ट स्पेक्ट्रल पैटर्न में प्रकाश को परावर्तित करती है। अन्वेषा इन सूक्ष्म विविधताओं को पकड़ कर यह निर्धारित कर सकता है कि कोई सतह प्राकृतिक है या किसी कृत्रिम छलावरण से ढकी हुई है। इसके अतिरिक्त, यह निम्नलिखित कार्यों में विशेष रूप से उपयोगी है:
• सीमावर्ती क्षेत्रों में टेरेन एनालिसिस और घुसपैठ का पता लगाना
• आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का आकलन
• भूमि उपयोग और नमी की मात्रा का मूल्यांकन
इस प्रकार की सटीक जानकारी सैन्य संचालन और आपातकालीन योजना के लिए अत्यंत उपयोगी होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
• हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैकड़ों संकीर्ण स्पेक्ट्रल बैंड को कैप्चर करती है।
• EOS-N1 अन्वेषा लगभग 600 किमी ऊँचाई की निम्न पृथ्वी कक्षा में संचालित होगा।
• PSLV ISRO का प्रमुख रॉकेट है, खासकर अर्थ-ऑब्ज़र्वेशन मिशनों के लिए।
• DRDO रणनीतिक निगरानी और रक्षा उपयोग के लिए उपग्रह विकसित करता है।
भारत की सैन्य अंतरिक्ष योजनाओं में अन्वेषा की भूमिका
अन्वेषा, भारत के बढ़ते अंतरिक्ष-आधारित निगरानी नेटवर्क में एक विशिष्ट हाइपरस्पेक्ट्रल परत जोड़ता है। यह उपग्रह सिंधु नेत्रा जैसे पूर्व DRDO मिशनों के बाद लॉन्च किया जा रहा है और भारत की उन योजनाओं से मेल खाता है जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को राष्ट्रीय सुरक्षा योजना में गहराई से एकीकृत करना है।
यह उपग्रह दर्शाता है कि भारत अब केवल रिमोट सेंसिंग तक सीमित नहीं, बल्कि उच्च-विश्वसनीयता और विश्लेषण-उन्मुख डेटा की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जो एक सशक्त रणनीतिक भारत की आधारशिला रखता है।