PRISM-SG पोर्टल: पुल निर्माण में डिजिटल पारदर्शिता और तेजी
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नई दिल्ली में PRISM-SG पोर्टल लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य रोड ओवर ब्रिज (ROBs) और रेलवे पुलों के निर्माण से जुड़े कार्यों को अधिक कुशल, पारदर्शी और तेज बनाना है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए परियोजनाओं में होने वाली देरी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
PRISM-SG पोर्टल क्या है?
PRISM-SG का पूरा नाम “पोर्टल फॉर रेल-रोड इंस्पेक्शन एंड स्टेज मैनेजमेंट – स्टील गर्डर्स” है। यह एक तकनीक आधारित प्रणाली है, जो पुल निर्माण से जुड़े निरीक्षण और अनुमोदन प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप में एकीकृत करती है। इसका मुख्य उद्देश्य सभी हितधारकों को एक ही मंच पर लाकर कार्यप्रवाह को सरल और प्रभावी बनाना है।
पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं
यह पोर्टल दस्तावेज़ीकरण और निरीक्षण प्रक्रियाओं का पूर्णतः ऑनलाइन प्रबंधन करता है। इसमें क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (QAP), वेल्डिंग प्रोसीजर स्पेसिफिकेशन शीट (WPSS) और स्टील गर्डर निर्माण के विभिन्न चरणों के निरीक्षण शामिल हैं। उपयोगकर्ता दस्तावेज़ अपलोड कर सकते हैं, उनकी जांच की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं, प्रश्नों का समाधान कर सकते हैं और निरीक्षण की समय-सारणी तय कर सकते हैं। इसके अलावा, इसमें रिपोर्ट, फोटो और परीक्षण परिणाम भी अपलोड किए जा सकते हैं, जिससे एक संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
हितधारकों के लिए एकीकृत मंच
PRISM-SG पोर्टल विभिन्न हितधारकों जैसे सड़क स्वामित्व विभाग, भारतीय रेलवे, ठेकेदारों, फैब्रिकेटर्स और निरीक्षण एजेंसियों को एक साथ जोड़ता है। इससे संचार में होने वाली बाधाएं कम होती हैं और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होती है। यह एकीकृत प्रणाली परियोजना के प्रत्येक चरण में बेहतर जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PRISM-SG एक डिजिटल पोर्टल है, जो पुल निर्माण में निरीक्षण और अनुमोदन को प्रबंधित करता है।
- रोड ओवर ब्रिज (ROB) रेलवे लाइनों के ऊपर सड़क संपर्क को बेहतर बनाते हैं।
- क्वालिटी एश्योरेंस प्लान (QAP) और WPSS जैसे दस्तावेज़ इस प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।
- यह पोर्टल रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डिजिटल ऑडिट ट्रेल प्रदान करता है।
अवसंरचना विकास में महत्व
इस पोर्टल के माध्यम से अनुमोदन और निरीक्षण में लगने वाला समय लगभग 12 महीनों से घटकर 3–4 महीने तक आने की संभावना है। इससे परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में मदद मिलेगी और देश के परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह पहल भारत के अवसंरचना विकास को तेज करने और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी।