North East Spring Festival 2026 Begins in Dimapur

North East Spring Festival 2026 Begins in Dimapur

नॉर्थ ईस्ट स्प्रिंग फेस्टिवल 2026 से सजेगा दीमापुर, सांस्कृतिक संगम का भव्य आयोजन
तीन दिवसीय नॉर्थ ईस्ट स्प्रिंग फेस्टिवल 2026, जिसे ‘फेस्टिवल ऑफ द नॉर्थ ईस्ट’ भी कहा जाता है, नागालैंड के दीमापुर स्थित एनईजेडसीसी परिसर में प्रारंभ होगा। इस आयोजन का संचालन नॉर्थ ईस्ट जोन कल्चरल सेंटर (एनईजेडसीसी), दीमापुर द्वारा दक्षिण-मध्य जोन कल्चरल सेंटर (एससीजेडसीसी), नागपुर के सहयोग से किया जा रहा है। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय के अधीन आयोजित किया जा रहा है।

इस बार यह उत्सव ‘मध्य दक्षिणी महोत्सव 2026’ के साथ संयुक्त रूप से आयोजित होगा, जिससे पूर्वोत्तर और दक्षिण-मध्य भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु स्थापित होगा।

सांस्कृतिक संगम और राष्ट्रीय एकता

इस महोत्सव का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध लोक एवं जनजातीय विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित करना है। साथ ही यह पारंपरिक कलाकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है। साझा सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करना इसका प्रमुख लक्ष्य है।

कार्यक्रम में पूर्वोत्तर के आठों राज्यों से 130 लोक कलाकार भाग लेंगे, जो विविध पारंपरिक कला रूपों का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन क्षेत्र की जीवंत सांस्कृतिक पहचान को उजागर करेगा।

युवा सहभागिता और संगीत प्रस्तुतियां

युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बैंड और कोयर प्रस्तुतियों को विशेष महत्व दिया गया है। शिलांग का ‘ब्लू टेम्पटेशन’, दीमापुर का ‘कोरोनेशन कोयर’, कोहिमा का ‘भ्रामोस’ और गुवाहाटी का ‘6 स्ट्रिंग्स’ जैसे समूह युवा दर्शकों को आकर्षित करेंगे।

मध्य दक्षिणी महोत्सव खंड के अंतर्गत मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ से 83 कलाकार भी प्रस्तुति देंगे, जिससे सांस्कृतिक विविधता का व्यापक प्रदर्शन होगा।

विस्तारित कार्यक्रम और क्षेत्रीय पहल

मध्य दक्षिणी महोत्सव को ‘भारत को जानो’ और ‘बॉर्डर एरिया प्रोग्राम’ जैसी पहलों के साथ जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त 2–3 मार्च को अरुणाचल प्रदेश के नामसाई और 5–6 मार्च को मेघालय के री-भोई में विस्तारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

ये आयोजन सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एनईजेडसीसी संस्कृति मंत्रालय के अधीन क्षेत्रीय कलाओं को बढ़ावा देता है।
  • एससीजेडसीसी का मुख्यालय नागपुर में स्थित है।
  • ‘भारत को जानो’ पहल भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य रखती है।
  • बॉर्डर एरिया प्रोग्राम सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।

एनईजेडसीसी के निदेशक डॉ. प्रसन्ना गोगोई ने कहा कि यह उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता का उत्सव है और कला के माध्यम से एकता को बढ़ावा देने का मंच है। यह पहल संस्कृति मंत्रालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत देश की विविध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और प्रोत्साहित किया जा रहा है।

Originally written on February 27, 2026 and last modified on February 27, 2026.

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