LHC में ड्यूटेरॉन की उपस्थिति से जुड़ी पहेली सुलझी: कोलैसेंस सिद्धांत को मिला नया प्रमाण
ड्यूटेरियम का नाभिक ड्यूटेरॉन — जिसमें केवल एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होता है — परमाणु भौतिकी के सबसे सरल बंधित तंत्रों में से एक है। इसकी अत्यंत कम बाइंडिंग एनर्जी के बावजूद, यह Large Hadron Collider (LHC) जैसे उच्च-ऊर्जा टकरावों में जीवित पाया गया है। यह लंबे समय से वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बना हुआ था, जिसे अब ALICE प्रयोग के नवीनतम प्रमाणों ने स्पष्ट किया है।
ड्यूटेरॉन क्यों लगता था बहुत “नाजुक”?
LHC में होने वाले प्रोटॉन-प्रोटॉन टकराव अत्यंत उच्च ताप और घनत्व वाले वातावरण का निर्माण करते हैं, जिसमें कण आपस में तीव्रता से क्रिया करते हैं। ऐसे में यह अपेक्षित था कि कमजोर बंधन वाला ड्यूटेरॉन इस उग्र अवस्था में नहीं टिक पाएगा। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि क्या ड्यूटेरॉन टकराव के दौरान ही बनता है या फिर बाद में इसके अवयव (प्रोटॉन और न्यूट्रॉन) आपस में जुड़ते हैं।
सीधे निर्माण बनाम कोलैसेंस सिद्धांत
ड्यूटेरॉन की उत्पत्ति को लेकर दो मुख्य सिद्धांत प्रस्तावित किए गए:
- सीधा उत्सर्जन (Direct Emission): यह मानता है कि ड्यूटेरॉन टकराव के दौरान ही सीधे उत्पन्न होता है।
- कोलैसेंस सिद्धांत (Coalescence): इसके अनुसार पहले प्रोटॉन और न्यूट्रॉन स्वतंत्र रूप से बनते हैं और यदि वे अंतरिक्ष व संवेग (momentum) में पास-पास हों, तो एक तीसरे कण (आमतौर पर पायन) की मदद से जुड़ जाते हैं। यह तीसरा कण अतिरिक्त ऊर्जा को हटाकर बंधन को संभव बनाता है।
ALICE प्रयोग और डेल्टा रेज़ोनेंस का साक्ष्य
CERN के LHC में स्थित ALICE डिटेक्टर द्वारा किए गए नवीनतम अध्ययन ने कोलैसेंस सिद्धांत को मजबूती प्रदान की है। वैज्ञानिकों ने फेम्टोस्कोपी तकनीक का उपयोग कर पायनों और ड्यूटेरॉनों के बीच संवेग सहसंबंध (momentum correlations) का विश्लेषण किया।
अध्ययन में Δ(1232) रेज़ोनेंस की उपस्थिति देखी गई — यह प्रोटॉन या न्यूट्रॉन की एक उत्तेजित अवस्था है, जो जल्दी ही एक पायन और न्यूक्लॉन में विघटित हो जाती है। यह देखा गया कि अधिकांश ड्यूटेरॉन, टकराव के तुरंत बाद नहीं बल्कि इन रेज़ोनेंस के विघटन के बाद बनते हैं, जब वातावरण अपेक्षाकृत शांत होता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ड्यूटेरॉन ड्यूटेरियम (हाइड्रोजन का एक समस्थानिक) का नाभिक है, जिसमें एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होता है।
- Large Hadron Collider CERN (जेनेवा के पास) में स्थित है और उच्च-ऊर्जा कण टकरावों का अध्ययन करता है।
- Δ(1232) रेज़ोनेंस न्यूक्लॉनों की एक अल्पायु उत्तेजित अवस्था है, जो पायन में विघटित होती है।
- Femtoscopy बहुत सूक्ष्म दूरी पर कणों के संवेग सहसंबंध का अध्ययन करती है, जिससे उनकी उत्पत्ति और अंतरक्रियाओं की जानकारी मिलती है।
खगोल भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान पर प्रभाव
ALICE टीम का अनुमान है कि लगभग 62% ड्यूटेरॉन Δ रेज़ोनेंस के विघटन के बाद बनते हैं, और यदि अन्य रेज़ोनेंसों को शामिल किया जाए तो यह आँकड़ा 80% तक पहुँचता है। चूँकि ये रेज़ोनेंस मुख्य टकराव क्षेत्र से थोड़ी दूरी पर विघटित होते हैं, इसलिए ड्यूटेरॉन अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र में “जन्म लेते हैं” और बच जाते हैं।
यह खोज न केवल उच्च-ऊर्जा टकरावों में हल्के नाभिकों के निर्माण को समझने में मदद करती है, बल्कि कॉस्मिक किरणों के साथ हुई टकरावों और संभावित डार्क मैटर संकेतों के विश्लेषण में भी नए दृष्टिकोण प्रदान करती है।