ISRO ने DEX उपकरण से किए कॉस्मिक डस्ट पर महत्वपूर्ण खुलासे: अंतरिक्ष मिशनों की सुरक्षा में मिलेगा नया आधार
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने पृथ्वी के वायुमंडल में लगातार टकरा रहे कॉस्मिक डस्ट पार्टिकल्स (ब्रह्मांडीय धूल कणों) के बारे में नए और महत्वपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्ष साझा किए हैं। यह जानकारी ISRO के पहले स्वदेशी कॉस्मिक डस्ट डिटेक्टर DEX (Dust EXperiment) के माध्यम से प्राप्त हुई है, जिसने पृथ्वी के नजदीकी अंतरिक्ष परिवेश की समझ को नया आयाम दिया है।
DEX उपकरण और वैज्ञानिक उपलब्धि
DEX भारत का पहला स्वदेशी कॉस्मिक डस्ट डिटेक्शन उपकरण है, जिसका भार मात्र 3 किलोग्राम है। इसे 1 जनवरी 2024 को XPoSat मिशन के साथ अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
जनवरी से फरवरी 2024 के बीच किए गए प्रायोगिक संचालन में DEX ने उच्च गति से टकराते हुए कई सूक्ष्म धूल कणों का सफलतापूर्वक पता लगाया। ISRO ने पुष्टि की कि पृथ्वी के वायुमंडल में हर 1,000 सेकंड (लगभग 16 मिनट) में एक सूक्ष्म कॉस्मिक डस्ट कण टकराता है।
इंटरप्लेनेटरी डस्ट पार्टिकल्स की पहचान
ISRO ने बताया कि ये कण Interplanetary Dust Particles (IDPs) हैं, जो धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से उत्पन्न सूक्ष्म मलबे होते हैं। ये कण पृथ्वी के वायुमंडल में एक पतली ‘मेटियोर लेयर’ का निर्माण करते हैं, जिससे टूटते तारे (shooting stars) जैसी घटनाएं देखी जाती हैं।
DEX के 140 डिग्री के व्यापक दृष्टिकोण ने इसे बहुविध टकराव संकेतों को दर्ज करने में सक्षम बनाया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि पृथ्वी के चारों ओर लगातार ब्रह्मांडीय सामग्री का प्रवाह हो रहा है।
तकनीकी विशेषताएँ और कक्षा से अवलोकन
DEX लगभग 9.5 डिग्री के कक्षीय झुकाव (orbital inclination) पर कार्य कर रहा है और यह दृश्य अवलोकन नहीं करता, बल्कि अत्यंत उच्च गति वाले टकरावों की ‘ध्वनि’ को सुनता है।
ISRO ने बताया कि यह उपकरण पृष्ठभूमि शोर और कक्षीय मलबे से धूल टकरावों को स्पष्ट रूप से अलग कर सका, जिससे इसकी मापन क्षमता सिद्ध हुई। यह सफलता पृथ्वी के निकट अंतरिक्ष क्षेत्र में सूक्ष्म कणों के घनत्व और व्यवहार की समझ को सशक्त बनाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- DEX भारत का पहला स्वदेशी कॉस्मिक डस्ट डिटेक्टर है।
- इसे XPoSat मिशन के साथ 1 जनवरी 2024 को लॉन्च किया गया।
- पृथ्वी के वायुमंडल में हर 1,000 सेकंड में एक सूक्ष्म कॉस्मिक डस्ट कण टकराता है।
- Interplanetary Dust मुख्यतः धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से उत्पन्न होते हैं।
अंतरिक्ष सुरक्षा और भविष्य के मिशनों के लिए महत्व
ISRO ने बताया कि कॉस्मिक डस्ट का अध्ययन उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये सूक्ष्म कण micro-impact damage का कारण बन सकते हैं।
यह डेटा भारत के गगनयान मिशन जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रमों की योजना में भी उपयोगी सिद्ध होगा। भविष्य में DEX जैसे उपकरणों का उपयोग शुक्र और मंगल जैसे ग्रहों के वायुमंडलीय वातावरण के अध्ययन में भी किया जाएगा, जिससे भारत की डीप-स्पेस विज्ञान और अन्वेषण क्षमता को बल मिलेगा।
इस खोज ने न केवल भारत के अंतरिक्ष विज्ञान को सशक्त किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सूक्ष्म खगोलीय घटनाओं के अध्ययन में नया योगदान दिया है।