IMF ने भारत की 2025 विकास दर 7.3% तक बढ़ाई: वैश्विक मंदी के बीच आर्थिक स्थिरता की पुष्टि
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की 2025 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। यह संशोधन दर्शाता है कि वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने उल्लेखनीय लचीलापन और स्थायित्व प्रदर्शित किया है। IMF की यह वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट भारत की आंतरिक मजबूती और मजबूत निवेश भावना को रेखांकित करती है।
अनुमान में वृद्धि के पीछे मुख्य कारण
IMF ने अपने पूर्वानुमान में 0.7 प्रतिशत अंकों की वृद्धि करते हुए कहा कि दिसंबर तिमाही में कॉर्पोरेट आय में शानदार प्रदर्शन और वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में मजबूत आर्थिक गतिविधि इसके प्रमुख कारण रहे। इसके अतिरिक्त, निवेशकों की आशावादी भावना और घरेलू मांग में निरंतरता ने निकट अवधि में विकास की संभावनाओं को और सुदृढ़ किया है।
मध्यम अवधि में विकास दर में संभावित स्थिरता
जहां 2025 की दृष्टि से परिदृश्य सकारात्मक है, वहीं IMF ने चेताया है कि 2026 और 2027 में भारत की विकास दर घटकर 6.4% हो सकती है। यह मंदी अस्थायी और चक्रीय कारकों के कम होने के कारण हो सकती है, जैसे कि महामारी के बाद की मांग में सामान्यीकरण और हाल के वर्षों में दी गई मौद्रिक एवं राजकोषीय सहायता का प्रभाव धीरे-धीरे कम होना।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका
IMF ने पुनः इस बात को दोहराया है कि भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण विकास इंजन बना हुआ है। ऐसे समय में जब कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते सुस्ती का सामना कर रही हैं, भारत की आर्थिक गति एक विशेष उदाहरण के रूप में सामने आई है। यह संशोधन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा हाल ही में जारी वृद्धि अनुमानों के अनुरूप है, जिसमें सरकार की पूर्वानुमानित दर से अधिक वृद्धि दर्ज की गई थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IMF वर्ष में दो बार World Economic Outlook रिपोर्ट जारी करता है।
- भारत 2025 में वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
- मध्यम अवधि में विकास की धीमी गति अस्थायी चक्रीय कारकों के कारण हो सकती है।
- भारत की GDP वृद्धि का आधिकारिक अनुमान NSO (राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय) द्वारा प्रदान किया जाता है।
वैश्विक संदर्भ और तुलनात्मक परिदृश्य
वैश्विक स्तर पर IMF ने कहा कि अमेरिका-प्रेरित व्यापार विघटन के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था ने आश्चर्यजनक रूप से स्थिर प्रदर्शन किया है। 2026 में वैश्विक विकास दर 3.3% रहने का अनुमान है, जिसका मुख्य आधार उत्तरी अमेरिका और एशिया में प्रौद्योगिकी एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित निवेश है। साथ ही अमेरिका और चीन के लिए भी विकास दर के अनुमान में सुधार किया गया है, जो व्यापार तनाव में कमी और निवेश की पुनर्स्थापना को दर्शाता है।
निष्कर्ष
IMF की ओर से भारत के विकास अनुमान में यह संशोधन न केवल देश की आर्थिक नीतियों की सफलता का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत वैश्विक स्तर पर एक स्थिर और भरोसेमंद आर्थिक भागीदार के रूप में उभर रहा है। हालांकि निकट भविष्य में कुछ धीमापन देखा जा सकता है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से भारत की विकास गति मजबूत बनी रहने की संभावना है। यह रिपोर्ट UPSC समेत अन्य परीक्षार्थियों के लिए वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण और भारत की भूमिका को समझने में अत्यंत उपयोगी है।