IMF की वार्षिक रिपोर्ट में भारत की राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को मिला ‘C’ ग्रेड
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की नवीनतम वार्षिक समीक्षा में भारत की राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts Statistics) को ‘C’ श्रेणी में रखा गया है। यह मूल्यांकन उस समय आया है जब भारत वित्त वर्ष 2028-29 की दूसरी तिमाही (Q2) के आँकड़े 28 नवंबर 2028 को जारी करने की तैयारी कर रहा है। IMF की इस रेटिंग से यह संकेत मिलता है कि भारत के आँकड़ा-संकलन तंत्र में अब भी कुछ पद्धतिगत (methodological) चुनौतियाँ बरकरार हैं।
IMF का आकलन: समय पर डेटा, पर पद्धति में कमियाँ
IMF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपने राष्ट्रीय खातों का डेटा समय पर और नियमित रूप से जारी करता है, लेकिन आँकड़ों की विश्वसनीयता और सटीकता को प्रभावित करने वाली कई पद्धतिगत कमजोरियाँ अब भी बनी हुई हैं। मुख्य समस्या 2011-12 के पुराने बेस ईयर के उपयोग से जुड़ी है, जो अब बदलती आर्थिक संरचना को ठीक से प्रतिबिंबित नहीं करता। इसके अलावा, Producer Price Indices (PPI) की सीमित उपलब्धता भी GDP और GVA जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों की सटीकता को प्रभावित करती है।
GDP अनुमान में असंगतियाँ
IMF ने अपने मूल्यांकन में भारत के उत्पादन (Production) और व्यय (Expenditure) आधारित GDP अनुमान में “काफी असमानता” की ओर संकेत किया है। भारत मुख्य रूप से आय (Income) दृष्टिकोण का उपयोग करता है, लेकिन साथ ही व्यय-आधारित आँकड़े भी प्रकाशित करता है। दोनों के डेटा स्रोतों और कवरेज में अंतर होने के कारण आँकड़ों में अंतर आ जाता है, विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) और व्यय प्रवाह (Expenditure Mapping) के संदर्भ में।
सांख्यिकीय तकनीकों में सुधार की आवश्यकता
IMF ने यह भी कहा है कि भारत के तिमाही आँकड़ों में मौसमी समायोजन (Seasonal Adjustment) का अभाव है, जिससे अल्पकालिक आर्थिक रुझानों का सटीक विश्लेषण कठिन होता है। संस्था ने सुझाव दिया कि भारत को Gross Fixed Capital Formation (GFCF) को संस्थागत क्षेत्रों (Institutional Sectors) के अनुसार विभाजित करने और विस्तृत तिमाही आँकड़े जारी करने की दिशा में सुधार करने चाहिए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IMF की रेटिंग प्रणाली A से D तक होती है; भारत को राष्ट्रीय खातों के लिए ‘C’ ग्रेड मिला है।
- वर्तमान GDP और CPI श्रृंखला 2011-12 बेस ईयर पर आधारित है।
- भारत 2026 तक GDP और CPI की नई पद्धति लागू करने की योजना बना रहा है।
- IMF ने भारत की समग्र सांख्यिकीय प्रणाली को ‘B’ ग्रेड प्रदान किया है।
मुद्रास्फीति और अन्य सांख्यिकीय क्षेत्रों पर मूल्यांकन
IMF की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को ‘B’ ग्रेड मिला है, लेकिन उसमें पुराने उपभोग बास्केट और वजन संरचना से जुड़ी चिंताएँ हैं। वहीं सरकारी वित्त, विदेशी क्षेत्र के आँकड़े, और मौद्रिक संकेतक सभी को भी ‘B’ श्रेणी में रखा गया। IMF ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली की कमजोरियाँ पिछले वर्ष जैसी ही बनी हुई हैं, हालांकि वास्तविक क्षेत्र (Real Sector) की सांख्यिकी को सुदृढ़ करने के लिए किए जा रहे सुधारों की गति संतोषजनक है।