IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने सूर्य की चुम्बकीय गतिविधियों की भविष्यवाणी में प्राप्त की बड़ी सफलता

IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने सूर्य की चुम्बकीय गतिविधियों की भविष्यवाणी में प्राप्त की बड़ी सफलता

सूर्य की 11-वर्षीय चुम्बकीय गतिविधि चक्र पृथ्वी पर अंतरिक्ष मौसम, सौर फ्लेयर और सैटेलाइट संचार पर गहरा प्रभाव डालता है। यह चक्र बिजली ग्रिड, नेविगेशन सिस्टम और अंतरिक्ष आधारित तकनीकों को भी बाधित कर सकता है। अब तक वैज्ञानिकों के लिए सूर्य के भीतरी चुम्बकीय क्षेत्रों की सीधी निगरानी संभव नहीं थी, जिससे पूर्वानुमान चुनौतीपूर्ण रहा। इस दिशा में IIT कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक बड़ा वैज्ञानिक प्रगति हासिल की है।

IIT कानपुर का डेटा-संचालित मॉडल

20 जनवरी को “Astrophysical Journal Letters” में प्रकाशित एक अध्ययन में Soumyadeep Chatterjee (PhD शोधार्थी) और डॉ. गोपाल हज़रा (सहायक प्रोफेसर) ने सूर्य के आंतरिक चुम्बकीय क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए एक डेटा-संचालित 3D मॉडल प्रस्तुत किया। यह मॉडल 1996 से 2025 तक की सौर सतह की चुंबकीय गतिविधियों पर आधारित है, जिससे सूर्य के आंतरिक व्यवहार की बेहतर समझ विकसित की गई है।

परंपरागत डाइनेमो मॉडलों से आगे

अब तक सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र की व्याख्या डाइनेमो मॉडल पर आधारित थी, जो अक्सर सनस्पॉट को आदर्श रूप में गोल आकार मानते हैं। लेकिन वास्तविकता में सनस्पॉट असमान और जटिल होते हैं। IIT कानपुर की टीम ने इन आदर्श मान्यताओं को त्याग कर वास्तविक पर्यवेक्षणीय डेटा को मॉडल में सम्मिलित किया, जिससे सौर गतिविधियों का अधिक सटीक प्रतिनिधित्व संभव हो सका।

उपग्रह डेटा से सौर आंतरिक क्षेत्र का विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने SOHO और Solar Dynamics Observatory जैसे अंतरिक्ष अभियानों द्वारा 1996 से 2025 तक एकत्रित सौर सतह के चुम्बकीय क्षेत्र के आंकड़ों को 3D मॉडल में डाला। इस प्रकार, उन्होंने सौर संवहन क्षेत्र के भीतर स्थित टोरोइडल (toroidal) चुंबकीय क्षेत्र की प्रकृति को अप्रत्यक्ष रूप से समझा, जो सनस्पॉट निर्माण की प्रमुख शक्ति होती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य:

  • सूर्य का चुम्बकीय चक्र औसतन 11 वर्ष का होता है।
  • ‘बटरफ्लाई डायग्राम’ से सूर्य के उच्च अक्षांश से भूमध्यरेखा की ओर सनस्पॉट के संचलन को दर्शाया जाता है।
  • टोरोइडल चुंबकीय क्षेत्र सनस्पॉट निर्माण को नियंत्रित करता है।
  • सौर चक्र 25 (Solar Cycle 25) वर्तमान में प्रचलित है।

सौर गतिविधियों की बेहतर भविष्यवाणी

IIT कानपुर का यह मॉडल सौर चक्र 23, 24 और 25 की गतिविधियों को सटीक रूप से पुन: निर्मित करने में सक्षम रहा है। परीक्षणों में यह मॉडल सौर चक्र के चरम (peak) की तीव्रता को तीन वर्ष पहले तक पूर्वानुमानित कर सकता है। डॉ. हज़रा के अनुसार, यह अध्ययन सौर चुम्बकीय प्रक्रियाओं की समझ को गहरा करता है और संभावित खतरनाक सौर घटनाओं के लिए समय रहते चेतावनी प्रदान कर सकता है, जो विशेष रूप से अंतरिक्ष आधारित संचार और तकनीकी प्रणालियों के लिए महत्वपूर्ण है।

यह उपलब्धि न केवल भारतीय खगोल भौतिकी के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भविष्य में वैश्विक अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमानों को भी अधिक सटीक और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

Originally written on February 2, 2026 and last modified on February 2, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *