IBBI का नया कदम: 2026 से लिक्विडेशन प्रक्रिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म अनिवार्य
दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (IBBI) ने लिक्विडेशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नए इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म्स पेश किए हैं, जो जनवरी 2026 से प्रभावी होंगे। यह कदम दिवाला और ऋणशोधन अक्षमता संहिता (IBC) के तहत प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और अनुपालन में सुधार की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
लिक्विडेशन रेगुलेशन्स में संशोधन
IBBI (लिक्विडेशन प्रक्रिया) विनियम, 2016 में 2 जनवरी 2026 को अधिसूचित संशोधनों के तहत अब इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स को लिक्विडेशन से संबंधित सभी विवरण, आवश्यक दस्तावेज़ों सहित, बोर्ड के इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा में जमा करने होंगे। इसका उद्देश्य प्रक्रिया की जटिलता को कम करते हुए पारदर्शिता को सुदृढ़ करना है।
तकनीकी एकीकरण और डेटा तर्कसंगतता
बोर्ड द्वारा जारी सर्कुलर में बताया गया है कि पुराने फॉर्म्स को पूरी तरह से संशोधित किया गया है ताकि दोहराव और अनावश्यक डेटा प्रविष्टियों से बचा जा सके। नए फॉर्म्स में पोर्टल पर पहले से उपलब्ध जानकारी स्वतः भरने की व्यवस्था की गई है, जिससे समय और श्रम की बचत होगी। इससे अनुपालन में आसानी होगी, लेकिन महत्वपूर्ण सूचना की उपलब्धता बनी रहेगी।
चार नए फॉर्म्स में संपूर्ण लिक्विडेशन चक्र शामिल
संशोधित ढांचे में चार फॉर्म्स—LIQ-1 से LIQ-4—के माध्यम से लिक्विडेशन की पूरी प्रक्रिया को कवर किया गया है:
- LIQ-1: प्रक्रिया की शुरुआत और सार्वजनिक घोषणा
- LIQ-2: प्रगति की रिपोर्टिंग और परिसंपत्ति वितरण
- LIQ-3: बिना दावे वाली राशियों का विवरण और परामर्श समिति की बैठकें
- LIQ-4: प्राप्तियाँ और भुगतान, और समापन रिपोर्ट
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- IBBI भारत में दिवाला पेशेवरों और दिवालियापन प्रक्रिया का नियामक है।
- लिक्विडेशन प्रक्रिया विनियम पहली बार 2016 में अधिसूचित किए गए थे।
- LIQ-1 से LIQ-4 फॉर्म्स लिक्विडेशन प्रक्रिया की पूरी जीवनचक्र को कवर करते हैं।
- दिवाला प्रक्रियाओं के लिए अब इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अनिवार्य कर दी गई है।
संक्रमण अवधि और अनुपालन में सहूलियत
IBBI ने स्पष्ट किया है कि LIQ-1, LIQ-3 और LIQ-4 फॉर्म्स 1 जनवरी 2026 से पोर्टल पर उपलब्ध होंगे, जबकि LIQ-2 फॉर्म 1 फरवरी 2026 से चालू किया जाएगा। पुराने फॉर्म्स इन तिथियों से समाप्त कर दिए जाएंगे। जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में विलंबित फाइलिंग पर दंड नहीं लगाया जाएगा ताकि संक्रमण सुगम हो सके।
इसके अतिरिक्त, बोर्ड ने एक फॉर्म-संशोधन सुविधा भी शुरू की है, जिसके माध्यम से ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण द्वारा गलतियों को ठीक किया जा सकेगा। हालांकि, गलत या अपूर्ण जानकारी की स्थिति में नियामकीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
यह सुधार न केवल लिक्विडेशन प्रक्रिया को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाएगा, बल्कि भारत की व्यापारिक सुगमता रैंकिंग को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।