GARBH-INi पहल: प्रीटर्म जन्म से निपटने के लिए भारत का सबसे बड़ा अध्ययन
भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए GARBH-INi पहल के तहत देश का सबसे बड़ा प्रेग्नेंसी कोहोर्ट अध्ययन शुरू किया है। इस कार्यक्रम में लगभग 12,000 गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया है, जिसका उद्देश्य समय से पहले जन्म (प्रीटर्म बर्थ) की समस्या से निपटना है। यह पहल जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के नेतृत्व में संचालित की जा रही है और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
GARBH-INi पहल का परिचय
GARBH-INi (Interdisciplinary Group for Advanced Research on Birth Outcomes) एक प्रमुख शोध कार्यक्रम है, जो क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजी, मल्टी-ओमिक्स बायोमार्कर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को एक साथ जोड़ता है। इसका उद्देश्य भारतीय आबादी के अनुरूप व्यक्तिगत भविष्यवाणी मॉडल विकसित करना है, जिससे गर्भावस्था और जन्म से जुड़े जोखिमों का समय रहते आकलन किया जा सके।
अध्ययन का पैमाना और डेटा संग्रह
यह अध्ययन दक्षिण एशिया के सबसे बड़े प्रेग्नेंसी कोहोर्ट में से एक बन चुका है। इसके तहत 16 लाख से अधिक जैविक नमूने (बायोस्पेसिमेन) और 10 लाख से अधिक अल्ट्रासाउंड छवियां एकत्र की गई हैं। इस विशाल डेटा के आधार पर एक राष्ट्रीय बायोरिपॉजिटरी और GARBH-INi-DRISHTI नामक डेटा साझाकरण प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देता है।
प्रमुख नवाचार और उपलब्धियां
इस पहल के तहत भारत की परिस्थितियों के अनुरूप एआई आधारित गर्भावस्था डेटिंग मॉडल विकसित किए गए हैं। इसके अलावा, माइक्रोबायोम आधारित प्रेडिक्शन तकनीक और आनुवंशिक मार्करों की पहचान भी की गई है, जो प्रीटर्म जन्म के जोखिम को पहले ही पहचानने में मदद करती है। ये नवाचार समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित कर नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य में सुधार लाने में सहायक होंगे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- GARBH-INi पहल जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा संचालित है।
- प्रीटर्म जन्म नवजात मृत्यु का प्रमुख कारण है।
- मल्टी-ओमिक्स में जीनोमिक्स, प्रोटीओमिक्स और मेटाबोलोमिक्स शामिल हैं।
- स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का उपयोग भविष्यवाणी और निदान में बढ़ रहा है।
सहयोग और भविष्य की दिशा
इस पहल के तहत निजी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, जैसे एआई आधारित अल्ट्रासाउंड प्रणाली और जोखिम मूल्यांकन उपकरणों का विकास। यह भारत की बढ़ती बायोइकोनॉमी को भी दर्शाता है, जो तेजी से विस्तार कर रही है।
इस प्रकार, GARBH-INi पहल वैज्ञानिक नवाचार को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए एक स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है और भविष्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर रही है।