G7 बैठक में भारत की सक्रिय भूमिका: वैश्विक शासन और सुधारों पर जोर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फ्रांस में आयोजित G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेकर वैश्विक मुद्दों पर भारत की स्पष्ट और प्रभावी भूमिका प्रस्तुत की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया में जारी संकट, ऊर्जा आपूर्ति में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है। भारत ने इस अवसर का उपयोग करते हुए वैश्विक शासन सुधार, विकासशील देशों की चिंताओं और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया।
संयुक्त राष्ट्र सुधार पर भारत का जोर
बैठक के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया। जयशंकर ने कहा कि वर्तमान वैश्विक संस्थाएं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों पर आधारित हैं, जो आज की बदलती दुनिया के अनुरूप नहीं हैं। भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद के विस्तार और अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करता रहा है, ताकि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया अधिक समावेशी और प्रभावी बन सके।
ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं
भारत ने ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। जयशंकर ने बताया कि ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर इन्हीं देशों पर पड़ता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सस्ती और सुलभ ऊर्जा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। भारत ने इस दिशा में वैश्विक सहयोग और संतुलित नीति निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।
आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती पर ध्यान
हाल के वर्षों में महामारी और भू-राजनीतिक संघर्षों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की कमजोरियों को उजागर किया है। इस संदर्भ में भारत ने मजबूत और विविधीकृत सप्लाई चेन विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि आर्थिक स्थिरता और व्यापार की निरंतरता के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि देश ऐसे तंत्र विकसित करें, जो किसी भी संकट के समय टिकाऊ साबित हो सकें।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- G7 सात विकसित अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है।
- भारत इसका सदस्य नहीं है, लेकिन अक्सर ‘आउटरीच पार्टनर’ के रूप में आमंत्रित किया जाता है।
- ‘ग्लोबल साउथ’ में विकासशील और कम औद्योगिक देश शामिल होते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र सुधार में सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग प्रमुख मुद्दा है।
द्विपक्षीय वार्ता और पश्चिम एशिया पर चर्चा
बैठक के दौरान जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के साथ भी द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरान व्यापार, कृषि और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। साथ ही, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके वैश्विक प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया गया। यह दर्शाता है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए बहुपक्षीय और द्विपक्षीय दोनों स्तरों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
कुल मिलाकर, G7 बैठक में भारत की भागीदारी यह दर्शाती है कि वह वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत न केवल अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि वैश्विक संतुलन, सहयोग और समावेशी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।