CSIR–NIScPR ने मनाया 5वां स्थापना दिवस: विज्ञान संप्रेषण, नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान में अग्रणी भूमिका

CSIR–NIScPR ने मनाया 5वां स्थापना दिवस: विज्ञान संप्रेषण, नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान में अग्रणी भूमिका

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के अधीन राष्ट्रीय विज्ञान संप्रेषण एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR–NIScPR) ने अपना 5वां स्थापना दिवस मनाया। यह आयोजन भारत में विज्ञान संप्रेषण, नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के प्रमाणीकरण के क्षेत्र में संस्थान की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्षेत्रीय भाषा में संवाद और वैश्विक सहभागिता के माध्यम से भारत की विज्ञान-नीति प्रणाली को सशक्त बनाने पर बल दिया गया।

विज्ञान संप्रेषण और AI के साथ समन्वय की दिशा

संस्थान की निदेशक गीता वाणी रायसम ने अपने स्वागत भाषण में NIScPR की विज्ञान संप्रेषण में ऐतिहासिक भूमिका और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैश्विक संस्थानों से सहयोग की आवश्यकता और क्षेत्रीय भाषाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के प्रयोग द्वारा प्रभावी संप्रेषण की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना है कि समावेशी संवाद ही वैज्ञानिक ज्ञान के सामाजिक प्रभाव को व्यापक बना सकता है।

पारंपरिक ज्ञान और नीति अनुसंधान की सुदृढ़ता

डॉ. विश्वजननी जे. सत्तिगेरी, प्रमुख – CSIR पारंपरिक ज्ञान डिजिटल पुस्तकालय (TKDL) इकाई, ने TKDL की वैश्विक मान्यता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि NIScPR ऐसा एकमात्र संस्थान है जो पारंपरिक ज्ञान के प्रमाणीकरण के लिए समर्पित है। TKDL के पूर्ण डिजिटलीकरण के साथ अब उन्नत शोध उपकरणों का उपयोग करते हुए साक्ष्य-आधारित नीति अनुसंधान को बल मिल रहा है, जिसका राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व है।

अनुसंधान फाउंडेशन का दृष्टिकोण और वैश्विक आकांक्षाएँ

मुख्य अतिथि डॉ. शिवकुमार कल्याणारामन, CEO – अनुसंधान राष्ट्रीय फाउंडेशन (ANRF), ने NIScPR की सराहना करते हुए इसे भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और AI विशेषज्ञों के बीच सहयोग की अपील की और ANRF के Saral AI टूल का उपयोग कर अनुसंधान को सरल और डिजिटल माध्यम से अधिक प्रभावशाली बनाने की सलाह दी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CSIR–NIScPR विज्ञान संप्रेषण, नीति अनुसंधान और पारंपरिक ज्ञान के प्रमाणीकरण पर केंद्रित संस्थान है।
  • TKDL (Traditional Knowledge Digital Library) भारत के पारंपरिक ज्ञान का एक डिजिटाइज्ड, वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त भंडार है।
  • ANRF (Anusandhan National Research Foundation) भारत को अनुसंधान और नवाचार में वैश्विक नेता बनाने का लक्ष्य रखता है।
  • क्षेत्रीय भाषाओं में विज्ञान संप्रेषण हेतु AI का प्रयोग NIScPR की प्राथमिक रणनीति है।

SVASTIK पोर्टल का शुभारंभ और अकादमिक भागीदारी

इस अवसर पर डॉ. कल्याणारामन ने SVASTIK वेब पोर्टल का शुभारंभ किया। यह एक राष्ट्रीय पहल है जिसे NIScPR द्वारा लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पारंपरिक ज्ञान को जनता तक पहुँचाना है। SVASTIK की सामग्री अंग्रेज़ी, 19 भारतीय भाषाओं और 5 विदेशी भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे इसकी पहुँच और प्रभावशीलता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।

कार्यक्रम में NIScPR के शोधार्थियों और S&T परियोजना कर्मियों द्वारा पोस्टर प्रदर्शन भी किया गया। कनिक मलिक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जिसमें संस्थान की नवाचार, नीति प्रासंगिकता और वैश्विक नेतृत्व की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

यह स्थापना दिवस आयोजन NIScPR की भविष्यगामी सोच और विज्ञान, परंपरा एवं नीति को एकीकृत करने की उसकी महत्त्वाकांक्षा का स्पष्ट प्रतिबिंब है।

Originally written on January 16, 2026 and last modified on January 16, 2026.

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