CALM-Brain पहल: मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत की बड़ी उपलब्धि

CALM-Brain पहल: मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत की बड़ी उपलब्धि

भारत में मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए रोहिणी नीलकेणी सेंटर फॉर ब्रेन एंड माइंड (CBM) के शोधकर्ताओं ने CALM-Brain नामक एक डिजिटल रिपॉजिटरी विकसित की है। यह पहल न्यूरोसाइकेट्रिक विकारों से जुड़े डेटा को एकीकृत कर वैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करती है। यह परियोजना NIMHANS और NCBS-TIFR के सहयोग से संचालित हो रही है, जो देश में उन्नत न्यूरोसाइंस शोध को बढ़ावा देने का संकेत है।

CALM-Brain पहल का परिचय

CALM-Brain भारत की पहली ऐसी डिजिटल रिपॉजिटरी है, जो मस्तिष्क की संरचना और कार्य से संबंधित विस्तृत डेटा को विभिन्न मानसिक विकारों के संदर्भ में एकत्रित करती है। इसकी शुरुआत वर्ष 2016 में ‘एक्सेलेरेटर प्रोग्राम फॉर डिस्कवरी इन ब्रेन डिसऑर्डर्स यूजिंग स्टेम सेल्स’ (ADBS) के तहत की गई थी। इस परियोजना को जैव प्रौद्योगिकी विभाग और प्रतिक्षा ट्रस्ट द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त है, जो इसके महत्व और विश्वसनीयता को दर्शाता है।

डेटा संग्रह और दायरा

यह रिपॉजिटरी विभिन्न प्रकार के डेटा को एक साथ जोड़ती है, जिसमें क्लिनिकल रिकॉर्ड, न्यूरोइमेजिंग, व्यवहार संबंधी पैटर्न और आनुवंशिक जानकारी शामिल हैं। यह पांच प्रमुख न्यूरोसाइकेट्रिक विकारों—लत (एडिक्शन), बाइपोलर डिसऑर्डर, डिमेंशिया, ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) और सिज़ोफ्रेनिया—पर केंद्रित है। इस बहुआयामी डेटा के माध्यम से जटिल मानसिक रोगों की गहराई से समझ विकसित की जा सकती है।

उद्देश्य और अनुसंधान में महत्व

CALM-Brain का मुख्य उद्देश्य इन विकारों के कारणों, विकास और जैविक प्रक्रियाओं को समझना है। यह प्लेटफॉर्म ओपन-सोर्स होने के कारण शोधकर्ताओं और चिकित्सकों को डेटा तक आसान पहुंच प्रदान करता है, जिससे सहयोग और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य अनुसंधान में तेजी आएगी और नई खोजों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CALM-Brain भारत की पहली डिजिटल रिपॉजिटरी है, जो मानसिक विकारों से संबंधित मस्तिष्क डेटा पर केंद्रित है।
  • इसकी शुरुआत 2016 में ADBS परियोजना के तहत की गई थी।
  • यह पांच प्रमुख विकारों—एडिक्शन, बाइपोलर, डिमेंशिया, OCD और सिज़ोफ्रेनिया—को कवर करती है।
  • यह NIMHANS और NCBS-TIFR के सहयोग से विकसित की गई है।

व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाएं

यह पहल मानसिक रोगों के निदान और उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। CALM-Brain की मदद से चिकित्सक रोग की प्रगति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे, शुरुआती लक्षणों की पहचान कर पाएंगे और मरीजों के लिए व्यक्तिगत उपचार योजनाएं तैयार कर सकेंगे। यह प्लेटफॉर्म मस्तिष्क में होने वाले जैविक परिवर्तनों को समझने में मदद करता है, जिससे ‘प्रिसिजन मेडिसिन’ के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर, CALM-Brain भारत के मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल अनुसंधान को मजबूत करेगा, बल्कि बेहतर और सुलभ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

Originally written on March 28, 2026 and last modified on March 28, 2026.

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