CAFE-3 नियम: ऑटो सेक्टर में ईंधन दक्षता और कार्बन कटौती की नई दिशा
भारत सरकार ने ड्राफ्ट कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी-3 (CAFE-3) नियमों के तहत एक लचीला अनुपालन ढांचा प्रस्तावित किया है, जिसका उद्देश्य ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उत्सर्जन को कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप है। नए नियमों में जुर्माना प्रावधानों को आसान बनाने के साथ-साथ कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग जैसी बाजार आधारित व्यवस्था को शामिल किया गया है, जिससे उद्योग को अधिक लचीलापन मिलेगा।
लचीले अनुपालन की ओर बदलाव
CAFE-3 के तहत पहले की तरह छोटे और बड़े वाहनों के बीच अंतर करने की बजाय अब पूरे वाहन बेड़े के औसत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने पर ध्यान दिया जाएगा। यह मॉडल ऑटो कंपनियों (OEMs) को अपनी रणनीति तय करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि उत्सर्जन मानकों को पूरा करने का दबाव भी बनाए रखता है। यह पांच वर्षीय व्यवस्था अप्रैल 2027 से लागू होगी और वित्त वर्ष 2027-28 से 2031-32 तक प्रभावी रहेगी।
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग की शुरुआत
इस नई नीति का एक प्रमुख पहलू कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग है। इसके तहत जो कंपनियां निर्धारित उत्सर्जन मानकों से बेहतर प्रदर्शन करेंगी, वे अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी। इन क्रेडिट्स को वे अन्य कंपनियों को बेच सकती हैं, जो अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं। इससे एक संतुलित और लागत-प्रभावी अनुपालन प्रणाली विकसित होगी। सभी लेन-देन की रिपोर्ट संबंधित नियामक संस्था को देना अनिवार्य होगा।
स्वच्छ तकनीकों को प्रोत्साहन
CAFE-3 नियमों में इलेक्ट्रिक वाहनों, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अधिक महत्व दिया गया है। इन वाहनों को विशेष वेटेज दिया जाएगा, जिससे कंपनियों के कुल उत्सर्जन औसत को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, यदि कोई कंपनी अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाती है, तो वह ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से क्रेडिट खरीदकर अपनी कमी पूरी कर सकती है। इन क्रेडिट्स की कीमत FY28 में ₹2,500 प्रति ग्राम CO₂/किमी से शुरू होकर FY32 तक ₹4,500 तक बढ़ेगी।
जलवायु लक्ष्यों के साथ सामंजस्य
यह नीति न केवल उत्सर्जन नियंत्रण को सुनिश्चित करती है, बल्कि उद्योग को प्रोत्साहन भी देती है कि वे स्वच्छ और टिकाऊ तकनीकों में निवेश करें। इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देकर यह नीति भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में सहायक होगी। साथ ही, यह सुनिश्चित करती है कि उद्योग विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CAFE मानक भारत में वाहनों की ईंधन दक्षता और CO₂ उत्सर्जन को नियंत्रित करते हैं।
- CAFE-3 नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और पांच वर्षों तक प्रभावी रहेंगे।
- ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ऊर्जा दक्षता नीतियों के लिए जिम्मेदार प्रमुख संस्था है।
- मॉडिफाइड इंडियन ड्राइविंग साइकिल (MIDC) का उपयोग वाहन ईंधन दक्षता परीक्षण के लिए किया जाता है।
CAFE-3 नियम भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को एक नई दिशा देने वाले हैं, जहां पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। यह पहल न केवल प्रदूषण कम करने में मदद करेगी, बल्कि देश को एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की ओर भी अग्रसर करेगी।