90 वर्ष की आयु में दलाई लामा को ग्रैमी पुरस्कार: करुणा और शांति का वैश्विक सम्मान

90 वर्ष की आयु में दलाई लामा को ग्रैमी पुरस्कार: करुणा और शांति का वैश्विक सम्मान

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने 90 वर्ष की आयु में ग्रैमी पुरस्कार जीतकर आध्यात्मिकता और वैश्विक लोकप्रिय संस्कृति के विलक्षण संगम को रेखांकित किया है। उन्हें यह पुरस्कार “Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama” नामक ऑडियोबुक के लिए “सर्वश्रेष्ठ ऑडियोबुक, नैरेशन और स्टोरीटेलिंग रिकॉर्डिंग” श्रेणी में प्रदान किया गया, जो करुणा, शांति और मानवता की साझा जिम्मेदारी जैसे मूल्यों पर आधारित है।

ग्रैमी सम्मान और स्वीकृति

इस पुरस्कार की घोषणा रविवार को की गई, और अमेरिकी गायक-संगीतकार रूफस वेनराइट ने दलाई लामा की ओर से यह पुरस्कार स्वीकार किया। दलाई लामा ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा एक संदेश में इसे व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सांझा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार विश्व शांति, करुणा, पर्यावरण संरक्षण और मानव एकता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को समर्पित है, जो आज की आठ अरब से अधिक वैश्विक आबादी के कल्याण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।

‘Meditations’ ऑडियोबुक के बारे में

“Meditations” एक विशेष ऑडियोबुक है, जिसे दलाई लामा ने स्वयं अपनी आवाज़ में प्रस्तुत किया है। इसमें शांत, आत्मविमर्शपूर्ण संगीत की पृष्ठभूमि के साथ उनके चिंतन प्रस्तुत हैं। यह पुस्तक थीम आधारित खंडों में विभाजित है जैसे – “Heart”, “Oneness”, “Harmony”, “Kindness”, “Water”, “Mind”, “Health”, “Peace”, “Essence”, और “Journey”। हर खंड उनके दार्शनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें आंतरिक शांति के लिए “सहृदयता” को मूल आधार बताया गया है।

भारतीय संगीतज्ञों का योगदान

इस प्रोजेक्ट में भारतीय शास्त्रीय संगीत का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रख्यात सरोद वादक अमजद अली खान तथा उनके पुत्र अमान अली बंगश और अयान अली बंगश ने इस परियोजना में संगीत दिया है। साथ ही, निर्माता और संगीतकार कबीर सहगल भी इस पहल का हिस्सा रहे। इस प्रकार यह प्रोजेक्ट भारतीय संगीत और वैश्विक आध्यात्मिक विमर्श का सुंदर संगम बन गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्रैमी पुरस्कार अमेरिका के रिकॉर्डिंग अकादमी द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
  • दलाई लामा तिब्बती बौद्ध धर्म के 14वें आध्यात्मिक नेता हैं।
  • ग्रैमी में ऑडियोबुक को नैरेशन और स्टोरीटेलिंग श्रेणियों में मान्यता प्राप्त होती है।
  • धर्मशाला का मैक्लोडगंज तिब्बती केंद्रीय प्रशासन का मुख्यालय है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और व्यापक प्रभाव

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (Central Tibetan Administration) ने इस पुरस्कार को पूरे तिब्बती समाज के लिए एक गौरवपूर्ण सम्मान बताया, हालांकि दलाई लामा के कर्नाटक प्रवास के कारण समारोह सीमित रहा। दूसरी ओर चीन ने इस पुरस्कार की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया और एक बार फिर दलाई लामा को राजनीतिक शरणार्थी बताया।

फिर भी, इस सम्मान ने दलाई लामा की शांति, नैतिकता और वैश्विक जिम्मेदारी की आवाज को और अधिक व्यापक स्तर पर पहुंचा दिया है। यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक संदेश भी आज की डिजिटल और सांस्कृतिक दुनिया में विश्वव्यापी प्रभाव छोड़ सकते हैं।

Originally written on February 3, 2026 and last modified on February 3, 2026.

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