7 वर्षों में पहली बार सिगरेट पर बड़ा कर बोझ: बजट 2026-27 में नई एक्साइज ड्यूटी और सेस व्यवस्था लागू
फरवरी 2026 से सिगरेट की कीमतों में तीव्र वृद्धि देखने को मिलेगी, क्योंकि सरकार ने तंबाकू उत्पादों पर एक नई उत्पाद शुल्क (Excise Duty) और सेस व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। यह भारत में सिगरेट पर लगभग सात वर्षों में पहला बड़ा कर संशोधन है, जिससे उपभोक्ताओं को जेब ढीली करनी पड़ेगी और उद्योग में व्यापक बदलाव आने की संभावना है।
जीएसटी मुआवजा सेस की जगह नई कर व्यवस्था
अब तक तंबाकू उत्पादों पर 28% GST के साथ मुआवजा सेस लागू होता था। लेकिन दिसंबर 2025 में संसद द्वारा स्वीकृत संशोधनों के तहत अब 40% GST के साथ अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सेस लगाया जाएगा। यह नई व्यवस्था जीएसटी मुआवजा सेस फ्रेमवर्क को पूरी तरह से प्रतिस्थापित कर देगी।
इसके तहत सिगरेट की लंबाई और श्रेणी के अनुसार अलग-अलग दरों पर प्रति स्टिक एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी। केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन कर इस नई व्यवस्था को औपचारिक रूप दिया गया है।
कीमतों में भारी वृद्धि: लंबाई और ब्रांड के अनुसार असर
डिस्ट्रिब्यूटर्स के अनुसार, प्रीमियम सिगरेट जैसे 76 मिमी की “विल्स नेवी कट” जो पहले ₹95 में मिलती थी, अब लगभग ₹120 तक पहुंच सकती है। वहीं 84 मिमी लंबी सिगरेट जैसे “गोल्ड फ्लेक किंग्स”, “विल्स क्लासिक” आदि की कीमतें ₹170 से बढ़कर ₹220–₹225 प्रति 10 स्टिक पैक तक हो सकती हैं।
सिगरेट के विभिन्न वर्गों में ₹22–₹55 तक की बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। पुरानी स्टॉक पर भी नई टैक्स व्यवस्था के अनुसार बिलिंग शुरू हो चुकी है, और ताजा स्टॉक अगले सप्ताह थोक बाजारों से उठाया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत में लगभग 7 वर्षों बाद सिगरेट पर कर में वृद्धि की गई है।
- नई कर संरचना के तहत 40% GST के अलावा अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी और सेस लागू होगा।
- GST मुआवजा सेस को तंबाकू उत्पादों पर समाप्त कर दिया गया है।
- सिगरेट पर अब लंबाई के आधार पर प्रति स्टिक एक्साइज ड्यूटी लगाई जाएगी।
अवैध व्यापार और नकली उत्पादों का खतरा
उद्योग विशेषज्ञों और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने चेतावनी दी है कि कीमतों में अचानक हुई तेज़ वृद्धि से तस्करी और नकली सिगरेटों का कारोबार बढ़ सकता है। ऑल इंडिया सिगरेट एंड टोबैको डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के अनुसार देश में लगभग 8,000–9,000 स्टॉकिस्ट हैं, जिनमें से कई ने कर बदलाव से पहले स्टॉक को होल्ड कर लिया था।
इस नई कर व्यवस्था से औपचारिक खुदरा और वितरण चैनलों पर प्रभाव पड़ सकता है, और उपभोक्ता अवैध विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। अतः इस नीति के सफल कार्यान्वयन के लिए निगरानी और प्रवर्तन तंत्र को और अधिक मज़बूत करने की आवश्यकता है।